शहरी विकास के मंत्री झाबरसिंह खर्रा के खुद के शहर का ही मास्टर प्लान पहेली बन गया है। सीकर के मास्टर प्लान को अफसरों ने मजाक बना दिया है। 2025 में भी सीकर का 2041 का मास्टर प्लान रद्द किया गया। अब फिर 8 माह बाद सीकर का मास्टर प्लान 2041 रद्द कर दिया। यानी एक ही मास्टर प्लान 2 बार रद्द। जबकि एक साल में 54 विधायक अपने शहर का मास्टर प्लान फाइनल करवा लागू करवा चुके। 309 शहरी निकायों में सिर्फ सीकर ऐसा शहर है, जिसका मास्टर प्लान इस सरकार में तीसरी बार बनाने की तैयारी है। एक साल पहले यह कहकर मास्टर प्लान रद्द किया गया कि सीकर शहरी सीमा में शामिल किए 38 गांवों की आपत्तियां ज्यादा थी, इसलिए रद्द किया। अब दोबारा भी किसान, मजदूर और संगठनों की भावनाओं को देखते हुए रद्द करने की बात कही गई है। लेकिन अब मास्टर प्लान का नया नाम दिया है। पहले 2 बार मास्टर प्लान 2041 बनाया गया। 88 गांवों को विस्तार में शामिल करने, जोनल प्लान की योजना यूडीएच मंत्री के गृह नगर सीकर का मास्टर प्लान-2041 निरस्त कर दिया गया है। अब इसकी जगह नया मास्टर प्लान-2047 तैयार किया जाएगा। यूआईटी वाले शहर के नए मास्टर प्लान से पहले सीकर की सीमा का विस्तार किया जाएगा, जिसमें आसपास के कई नए गांवों और ढाणियों को जोड़ा जाएगा। पहले करीब 50 गांव शामिल थे, जिन्हें बढ़ाकर 88 गांवों तक करने की योजना है। यूडीएच मंत्री खर्रा के अनुसार, नए मास्टर प्लान में सीकर की जनता की आपत्तियों और सुझावों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसलिए ‌सबसे विवादित मास्टर प्लान सीकर का मास्टर प्लान कांग्रेस राज में बना। भाजपा सरकार ने आते ही पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा पर खुद और चहेतों का मार्केट तैयार करने के लिए रोड़ की चौड़ाई बदलने, मास्टर प्लान को तोड़ मरोड़ने का आरोप लगाते हुए 2024 में रद्द कर दिया था। इस कारण यह प्रदेश का सबसे विवादित मास्टर प्लान बन गया। किसान आंदोलन पर पिछले साल रद्द, अब बिना कारण सीकर मास्टर प्लान-2041 2025 में सितंबर में अखिल भारतीय किसान सभा के लंबे आंदोलन के बाद रद्द किया था। सभा के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व विधायक पेमाराम ने इसे 50 गांवों की जीत बताया था। अब रद्द करने का कोई कारण नहीं।