मेडिसिटी में 4.50 लाख वर्ग मीटर भूमि पर कैंसर अस्पताल बनाने का प्रस्ताव भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा महात्मा गांधी अस्पताल की ओपीडी में लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए प्रशासन अब क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसके लिए करीब 81.13 लाख रुपए का बजट प्रस्तावित है। इस सिस्टम को समझने के लिए नोडल अधिकारी जयपुर के जयपुरिया अस्पताल का दौरा करेंगे। इसके लागू होने से मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों कतार में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। मॉनिटर के जरिए टोकन व्यवस्था संचालित होगी। मरीजों के बैठने के लिए बेंच लगाई जाएंगी। वे उन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करेंगे। टोकन नंबर से उन्हें पता चलेगा कि उनका नंबर कितनी देर में आएगा। यह भी पता चलेगा कि किस कमरे में किस डॉक्टर को दिखाना है। राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी (आरएमआरएस) की बैठक में विकास का एक व्यापक खाका खींचा गया। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू और मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. वर्षा सिंह की मौजूदगी में हुए इस मंथन का मुख्य केंद्र एमजी की चिकित्सा सेवाओं का विस्तार रहा। मरीजों की सुविधाओं को हाईटेक बनाना भी प्राथमिकता रही। मेडिसिटी में बनेगा कैंसर केयर और सुपर स्पेशिएलिटी विंग भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मेडिसिटी में राजकीय अस्पताल के लिए आरक्षित 4.50 लाख वर्गमीटर भूमि को एमजी अस्पताल के नाम आवंटित कराने का प्रस्ताव रखा गया है। यहां सुपर स्पेशिएलिटी विंग, सैटेलाइट अस्पताल और कैंसर केयर यूनिट स्थापित की जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भीलवाड़ा वासियों को जयपुर, उदयपुर या अहमदाबाद की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके साथ पटरी पार की आबादी को सैटेलाइट अस्पताल की सुविधाएं मिलेंगी, जो अभी तक सीधे तौर पर एमजी हॉस्पिटल पर ही निर्भर है। फंड का प्रभावी उपयोग ^अस्पताल में उपलब्ध 24.86 करोड़ के फंड का प्रभावी उपयोग कर हम ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जहां मरीज को कोई असुविधा या परेशानी न हो। भूमि आवंटन और क्यू मैनेजमेंट सिस्टम इस दिशा में बड़े कदम हैं। - डॉ. अरुण गौड़, अस्पताल अधीक्षक शिफ्ट होंगे कार्यालय, बनेगा प्रशासनिक ढांचा अस्पताल परिसर को पूरी तरह चिकित्सा सेवाओं के लिए समर्पित करने के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर को आयुर्वेद भवन में शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। वहीं, पुराने पीएमओ व सीएमएचओ कार्यालय को खाली कराकर अस्पताल प्रशासन अपने उपयोग में लेगा। साथ ही, मरीजों के परिजनों के लिए कैंटीन में आधुनिक सुविधाएं, शुद्ध पेयजल के लिए आरओ सिस्टम और वार्डों में कूलिंग सिस्टम (कूलर /एग्जॉस्ट) लगाने के निर्देश दिए गए हैं।