टोंक-बूंदी जिले को जोड़ने वाले 5 किलोमीटर लंबे मार्ग की बदहाली से परेशान टोडा का गोठड़ा के ग्रामीणों ने अब पंचायत चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी है। गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) को देकर स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण का काम धरातल पर शुरू नहीं होने तक गांव का कोई व्यक्ति पंचायत निकाय चुनाव में नामांकन दाखिल नहीं करेगा और न ही मतदान करेगा। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से गांव के लोगों का रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और बाजार के लिए आवागमन जुड़ा है, लेकिन लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं हुआ है। हेमराज मीणा, रामकुंवार, रामजस मीणा, सुरेश मीणा, हेमेंद्र सिंह, आकाश, गणेश, रामस्वरूप, गोपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह और विश्वास सहित ग्रामीणों ने बताया कि मार्ग का टोंक जिले की सीमा में आने वाला करीब 2.5 किलोमीटर हिस्सा 15 साल पहले बना था। इसके बाद मरम्मत नहीं होने से सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। वहीं, बूंदी जिले की सीमा में आने वाला शेष 2.5 किलोमीटर हिस्सा अब भी कच्चा है। बारिश में रास्ता दलदल में बदलने से आवागमन बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार समस्या बताने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कई सालों से नेताओं के चुनावी वादों और अधिकारियों के खोखले आश्वासन से त्रस्त व लगातार मांग अनसुनी रहने के बाद ही उन्होंने मतदान बहिष्कार का फैसला किया है। न नामांकन, न मतदान-प्रचार को भी करेंगे विरोध : ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि सड़क निर्माण की मांग पूरी होने तक पंचायत निकाय चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। गांव से कोई प्रत्याशी नामांकन दाखिल नहीं करेगा और मतदाता भी वोट नहीं डालेंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि मांग पूरी होने तक गांव में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार का विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सड़क का काम शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। 15 साल से मरम्मत का इंतजार : ग्रामीणों का कहना है कि टोडा का गोठड़ा से बूंदी का गोठड़ा तक करीब 5 किलोमीटर का रास्ता दो जिलों की सीमा में आता है। ग्रामीणों के मुताबिक, टोंक जिले के हिस्से में ढाई किलोमीटर सड़क की हालत खराब है और जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं। बूंदी जिले की सीमा में ढाई किलोमीटर हिस्सा कच्चा होने से बारिश के दौरान दलदल जैसी स्थिति बन जाती है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजाना काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।