डूंगरपुर| डाइट में वागड़ी भाषा पर सातवीं कार्यशाला हुई। संयोजन दिनेश प्रजापति ने किया। इसमें डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर के साहित्यकारों, शिक्षकों, पत्रकारों और शोधार्थियों ने भाग लिया। भामाशाह ग्राम पंचायत विकासनगर के युवा सरपंच सुनील डेंडोर के आर्थिक सहयोग से हुआ। प्रथम सत्र में परिचय और पंजीयन के साथ पूर्व में आयोजित कार्यशालाओं की समीक्षा की गई। द्वितीय सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार उपेंद्र अणु ने वागड़ी को एक मानक भाषा के रूप में स्थापित करने पर विचार रखे। उन्होंने डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर क्षेत्र में बोले जाने वाले विभिन्न टोन और शब्दों की भिन्नता पर चर्चा करते हुए भाषाई एकरूपता लाने पर जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार भविष्य दत्त भविष्य ने वागड़ी में गद्य लेखन और पठन विषय पर सत्र लेते हुए प्रतिभागियों से हिंदी वाक्यों का वागड़ी में अनुवाद करवाया। इसमें वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश पंचाल ने सृजनात्मक लेखन को बढ़ावा देने की बात कही। वहीं सतीश आचार्य ने वागड़ी भाषा को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए नई पीढ़ी को इसे सिखाने की आवश्यकता बताई। समापन में प्रजापति ने बताया कि वागड़ी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए बांसवाड़ा में तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी।