करौली जिले में लम्पी स्किन डिजीज के 120 गोवंश संक्रमित पाए गए हैं। पशुपालन विभाग ने इनके इलाज और निगरानी के लिए टीमें बनाई हैं। इनमें से 13 से ज्यादा पशु पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जबकि बाकी का इलाज चल रहा है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि संक्रमित पशुओं का तुरंत इलाज कराएं और उनके बेवजह आवागमन से बचें। पशुपालन विभाग के मुताबिक, जिले में लम्पी स्किन डिजीज के मामले 1 सितंबर से सामने आने लगे थे। इसके बाद विभाग ने अलग-अलग इलाकों में टीमें बनाकर संक्रमित पशुओं की पहचान, इलाज और निगरानी का काम शुरू किया। जिले में मिले 120 मामलों में से सबसे ज्यादा 35 गोवंश टोडाभीम क्षेत्र में संक्रमित मिले हैं। सूरौठ में 34, बालघाट में 18, नादौती में 16, हिंडौन में 11 और सपोटरा में 6 मामले सामने आए हैं। मासलपुर, मंडरायल और श्रीमहावीरजी इलाकों में अभी तक कोई मामला नहीं मिला है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक गंगासहाय मीणा ने बताया कि 13 से ज्यादा संक्रमित गोवंश इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। बाकी पशुओं का इलाज लगातार किया जा रहा है। विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में निगरानी के साथ इलाज कर रही हैं। विभाग ने पशुपालकों से यह भी अपील की है कि लम्पी से संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को दूसरी जगहों पर न ले जाएं। पशुओं के बेवजह आवागमन को रोकने से संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। करौली जिले में करीब 70 हजार से ज्यादा गोवंश है। वहीं, जिले में कुल पशुधन की संख्या लगभग 5.65 लाख है। पशुपालन विभाग ने अब तक करीब 45 हजार पशुओं का टीकाकरण करने की जानकारी दी है। बेसहारा गोवंश में बीमारी के इलाज के लिए भी प्रशासन स्तर पर कोशिशें की जा रही हैं। पशुपालन विभाग ने बेसहारा पशुओं के इलाज के लिए जिला कलेक्टर से जरूरी व्यवस्थाएं कराने की सिफारिश की है, ताकि उन्हें भी समय पर इलाज मिल सके।