पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) को टोंक में ब्रह्माकुमारी अपर्णा दीदी ने कहा-धरती को माता मानकर पूजना हमारी भारतीय संस्कृति है। प्रकृति की रक्षा करना ही सच्चा मानव धर्म है। बुधवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शाखा टोंक के राजयोग भवन में हमारी शक्ति-हमारा ग्रह विषय पर पर कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी अपर्णा दीदी सहित सभी सदस्यों ने राजयोग ध्यान के माध्यम से पृथ्वी (ग्लोब) को रखकर संपूर्ण प्रकृति के लिए पवित्र-सकारात्मक संकल्प लिए। साथ ही प्रकृति संरक्षण की शपथ दिलाई। हमारी संस्कृति में प्रकृति के सम्मान की भावना ब्रह्माकुमारी अपर्णा दीदी ने कहा- भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण सदैव एक महत्वपूर्ण और पूजनीय परंपरा का हिस्सा रहा है। हमारे यहां पृथ्वी को माता स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। वृक्षों, नदियों, पर्वतों, अग्नि और वायु जैसे प्रकृति के सभी तत्वों के प्रति सम्मान की भावना सिखाई गई है। वर्तमान में मनुष्य अपने स्वार्थवश प्रकृति का अत्यधिक दोहन कर रहा है। इसके दुष्परिणाम हम प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं। अतः अब समय आ गया है कि हम सभी दृढ़ संकल्प लेकर प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे आएं, क्योंकि यह हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। हमें न केवल प्रकृति के पंचतत्वों को प्रदूषण से बचाना है, बल्कि समाज में इसके प्रति जागरूकता भी फैलानी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके। भौतिकवादी दौड़ में प्रकृति से बनी दूरी ब्रह्माकुमारी गुंजन दीदी ने कहा- आज की भौतिकवादी दौड़ में मानव ने विकास तो किया है, लेकिन इसके साथ ही प्रकृति से दूरी भी बढ़ा ली है। यदि हम एक पल रुककर सोचें, तो समझ आएगा कि इस विकास की कीमत कितनी भारी पड़ रही है। प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और सीमित उपयोग ही सच्चा संरक्षण है, जिससे सभी जीवों का भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित शाश्वत यौगिक खेती पद्धति की जानकारी देते हुए बताया- यह पद्धति न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक वरदान सिद्ध हो रही है। कार्यक्रम में सभी को राजयोग ध्यान का अभ्यास करवाया और प्रकृति के संरक्षण के लिए संकल्प दिलाया।