भास्कर संवाददाता| टोंक प्रदेश में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने के कुछ मामले सामने आने के बाद ऐसे मामलों में सभी की जांच कराने के तहत जिले में हाल ही 15 कर्मचारियों की दिव्यांगता की मेडिकल बोर्ड से जांच कराने के लिए बुलाया गया। इनमें से एक जांच कराने मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ और एक कर्मचारी के 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता पाई गई। मेडिकल कॉलेज सआदत अस्पताल में करीब एक सप्ताह पहले जिला प्रशासन के निर्देश पर यह जांच कराई गई थी। सआदत अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल बोर्ड से कराई जांच की रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी है। जिले के सभी दिव्यांग कर्मचारी हड्डी रोग से सम्ब​न्धित थे। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के निर्देश पर ऐसी जांच सभी जिलों में कराई गई है। ये डॉक्टर शामिल हुए बोर्ड में: 15 का​र्मिकों को 23 अप्रेल को सुबह 9 बजे जांच कराने के लिए सआदत अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने को कहा गया था। बोर्ड में डॉ. सुरेश सैनी (हड्डी रोग), डॉ. अंकित विजय (मेडिसन) तथा डॉ. रामजस चौधरी (न्यूरो सर्जरी) को शामिल किया गया था। इन कार्मिकों के लगाए दिव्यांग प्रमाण पत्र के अनुरूप नए सिरे से जांच कर दिव्यांगता की रिपोर्ट देनी थी। 14 का​र्मिकों की जांच के बाद बोर्ड ने रिपोर्ट सौंप दी है। एक का​र्मिक आया नहीं, एक की दिव्यांगता कम पाई गई: मेडिकल बोर्ड के समक्ष कुल 15 का​र्मिकों को पेश होना था। इसमें से टोंक कलेक्ट्रेट में कार्यरत सहायक राजस्व लेखाधिकारी (ग्रेड प्रथम) विकार अहमद बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए। बताया जाता है कि जांच के दिन कोई आवश्यक मीटिंग होने के कारण वे उसमें व्यस्त रहे और जांच के लिए नहीं आ सके। वहीं, बोर्ड की जांच के बाद एक का​र्मिक की दिव्यांगता 40 के बजाए करीब 6 प्रतिशत ही पाई गई। बाकी 13 कार्मिकों में 40 से लेकर 55 प्रतिशत तक दिव्यांगता पाई गई। इनमें 4 का​र्मिक टोंक जिला मुख्यालय पर विभिन्न सेक्शन में, 2-2 कर्मचारी पीपलू और मालपुरा तथा एक का​र्मिक टोडारायसिंह में कार्यरत है। अन्य छह भी अलग-अलग विभागों में नौकरी कर रहे हैं।