जिले की चिकित्सा व्यवस्था को दो हिस्सों में बांटकर बेहतर मॉनिटरिंग के लिए सृजित किया गया सीएमएचओ द्वितीय का पद वर्तमान में संसाधनों और स्टाफ के अभाव में महज एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह गया है। तीन साल पहले हुए इस विभाजन का उद्देश्य सायरा, गोगुंदा, बड़गांव, मावली, भींडर, वल्लभनगर और कुराबड़ जैसे 7 ब्लॉकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। वर्तमान में सीएमएचओ द्वितीय डॉ. ओ.पी. रायपुरिया के पास न केवल इस मुख्य पद का दायित्व है, बल्कि वे आरसीएचओ, डिप्टी सीएमएचओ एनसीडी और अतिरिक्त सीएमएचओ सहित आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार अकेले ही संभाल रहे हैं। यह पूरा प्रशासनिक ढांचा फिलहाल महज तीन कमरों और चार मंत्रालयिक कर्मचारियों के भरोसे टिका है। विभाग में एक भी अन्य राजपत्रित अधिकारी या डॉक्टर की नियुक्ति न होने के कारण प्रशासनिक कार्यों से लेकर फील्ड मॉनिटरिंग तक की कमान एक ही व्यक्ति के पास है। इसका सीधा असर जिले के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर पड़ रहा है। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ) का पद रिक्त होने से टीकाकरण की प्रभावी निगरानी और एनसीडी स्क्रीनिंग जैसे गंभीर रोगों की जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई है। सात ब्लॉकों के स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण और राज्य सरकार को भेजी जाने वाली दैनिक रिपोर्टिंग भी स्टाफ की इस भारी कमी के कारण चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसी है व्यवस्था और विवशता - सीए एचओ द्वितीय (कार्यकारी पक्ष) वर्तमान में सायरा, गोगुन्दा, बड़गांव, मावली, भींडर, वल्लभनगर और कुराबड़ जैसे सात ब्लॉकों की जिम्मेदारी इस कार्यालय पर है। स्टाफ की भारी कमी के कारण डेटा रिपोर्टिंग, कैंसर-डायबिटीज स्क्रीनिंग (एनसीडी) और ग्रामीण केंद्रों के नियमित निरीक्षण में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। साल 2023 से अब तक यह पद अस्थाई व्यवस्थाओं के भरोसे ही चल रहा है। सीएमएचओ प्रथम (प्रशासनिक पक्ष) सीएमएचओ प्रथम डॉ. अशोक आदित्य का कहना है कि शुरुआत में तीन कमरे व्यवस्था के तौर पर दिए थे। अब नियम के अनुसार सीएमएचओ द्वितीय कार्यालय अपने लिए किराये का स्वतंत्र भवन ले सकता है। कर्मचारियों की स्वीकृति-नियुक्ति सरकार के स्तर पर ही संभव है। हम अपने स्तर पर अधिकारी नहीं दे सकते। दोनों कार्यालयों की रिपोर्टिंग अलग-अलग है, इसलिए प्रगति के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है। गेंद सरकार के पाले में दोहरी कमान वाले सिस्टम में तालमेल की कमी और संसाधनों का अभाव स्पष्ट दिख रहा है। गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि क्या वह सीएमएचओ द्वितीय कार्यालय को स्वतंत्र स्टाफ और भवन उपलब्ध कराकर इस पद के सृजन के मूल उद्देश्य को सार्थक करती है या नहीं?