शहर भाजपा में पिछले एक वर्ष से सुलग रही अंतर्कलह अब सड़कों पर आ चुकी है। यह इसी साल नवंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों से पहले पार्टी के लिए खतरे की घंटी की तरह होती जा रही है। जनवरी में जिला संगठन में हुए बदलाव के साथ शुरू हुई यह खींचतान अब केवल पद की नहीं, बल्कि मेवाड़ के इस सियासी गढ़ पर वर्चस्व की लड़ाई बन गई है। एक ओर पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया का दशकों पुराना प्रभाव है तो दूसरी ओर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ की नई टीम, जिसने संगठन में व्यापक बदलाव कर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। इस बीच पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी समर्थकों की सक्रियता ने इस विवाद को त्रिकोणीय बना दिया है। इसलिए बैकफुट पर संगठन... उदयपुर फाइल्स ने आग में घी डाला, विपक्ष ने बनाया मुद्दा ‘उदयपुर फाइल्स’ के कथित वीडियो प्रकरण ने संगठन की आंतरिक कलह में आग में घी डालने का काम किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मुद्दे को उठाकर भाजपा को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया। इस प्रकरण ने न केवल कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाला है, बल्कि पार्टी की सार्वजनिक छवि को भी प्रभावित किया है। विवाद की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मामला अब जयपुर से दिल्ली तक चर्चा का विषय बन गया है। अपनों के ही वार राजनीतिक हलकों में उस समय खलबली मच गई जब भाजपा नेता विजय प्रकाश विप्लवी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राज्यपाल की सक्रियता पर सवाल उठा दिए। विप्लवी ने संवैधानिक पद की गरिमा के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोला है। जोशी की चुप्पी पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी ने घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन उनके करीबियों की आक्रामकता और उन पर कटारिया की सीधी टिप्पणियां संकेत दे रही हैं कि मेवाड़ भाजपा में ‘सब ठीक’ नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय से उपजी टीस अब एक बड़े विखंडन की ओर इशारा कर रही है। नगर निगम में 7वीं बार बोर्ड बनाने की चुनौती नगर निगम भाजपा का वह अजेय दुर्ग है, जहां 6 कार्यकाल से कमल खिल रहा है। लेकिन इस बार चुनौतियां कठिन हैं, क्योंकि वार्ड 70 से बढ़कर 80 हो गए हैं। गुटबाजी से टिकट वितरण में समय बड़े पैमाने पर भितरघात की आशंका है। 3 दशक से सत्ता का इंतजार कर रही कांग्रेस के लिए वापसी का अवसर पैदा हुआ है।