उदयपुर के सेक्टर-4 स्थित अटल सभागार में रविवार से ‘छठे शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। घुंघरुओं की थाप और मधुर संगीत के साथ शुरू हुए इस दो दिवसीय आयोजन में देशभर की सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का आयोजन कथक आश्रम उदयपुर और ऑल इंडिया डांसर्स एसोसिएशन (आइडा) की ओर से किया जा रहा है। महोत्सव का उद्घाटन पूर्व राजपरिवार की सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़, शहर विधायक ताराचंद जैन, जगदीश राज श्रीमाली सहित अन्य अतिथियों ने दीप जलाकर कर किया। इस अवसर पर निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने कहा कि नृत्य केवल शारीरिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, साधना और आराधना का संगम है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख, मिलन और बिछोह जैसी भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम नृत्य है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटियां भी ओडिसी नृत्य के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। 22 राज्यों के 400 से अधिक कलाकार शामिल कथक आश्रम की निदेशक चंद्रकला चौधरी ने बताया कि महोत्सव में केरल, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता और दिल्ली सहित 22 राज्यों के 400 से अधिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। पहले दिन आयोजित प्रतियोगिता में 220 प्रतिभागियों ने 80 प्रस्तुतियां दीं। इसमें कलाकारों ने श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत रसों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आइडा निदेशक रितेश बाबू ने बताया कि शरण्या बिष्ट के कथक तथा विनय तिवारी और सुमि अजय के भरतनाट्यम ने विशेष आकर्षण बटोरा। तांबावती नगरी सम्मान की शुरुआत महोत्सव में कलाकारों के सम्मान और प्रोत्साहन के लिए उदयपुर के प्राचीन नाम पर ‘तांबावती नगरी सम्मान’ की शुरुआत की गई। पहले दिन भिलाई की झांसी भारद्वाज, बिलासपुर की वारिजा विजय राय, देवांशी गौर और हैदराबाद की अद्युति कॉन्केपूड़ी को इस सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं, मध्यप्रदेश के ‘ताल तरंग कला केंद्र’ को ‘बेस्ट इंस्टिट्यूट ऑफ द डे’ चुना गया। कार्यक्रम में सचिव चंद्रगुप्त सिंह चौहान सहित कला जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। उदयपुर में आयोजित यह महोत्सव भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मंच बन रहा है।