उदयपुर में विधायक गणेश गोगरा ने कहा- आदिवासी समाज न तो हिंदू हैं, न मुस्लिम और न ही ईसाई। उन्होंने कहा- हमारी अपनी एक विशिष्ट पहचान है, जिसे किसी दूसरे धर्म की श्रेणी में बांधना गलत है। उदयपुर में गुरुवार को आदिवासी समाज के सैकड़ों लोगों ने संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर सड़क पर प्रदर्शन किया। रैली की अगुवाई डूंगरपुर विधायक गणेश गोगरा ने की। इस मौके पर आदिवासियों ने कहा- उनकी जीवनशैली और परंपराएं बाकी धर्मों से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए जनगणना में उन्हें अलग से 'आदिवासी धर्म कोड' दिया जाना चाहिए। अपनी पहचान, संस्कृति और हक की लड़ाई को लेकर विरोध प्रदर्शन में समाज के लोगों ने नारे लगाए। विधायक ने कहा- प्रकृति के पूजक हैं आदिवासी विधायक गणेश गोगरा ने कहा- आदिवासी प्रकृति के पूजक हैं और उनकी जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी पहचान को मान्यता नहीं दी, तो आने वाले समय में उनकी संस्कृति और जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे। विधायक का दावा- 1951 तक था अलग कोड प्रदर्शन के दौरान विधायक गोगरा ने इतिहास का हवाला भी दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1871 से लेकर 1951 तक आदिवासियों की गिनती एक अलग श्रेणी में की जाती थी। उन्होंने कहा- उस वक्त उनके लिए कोड नंबर 9 था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जैन धर्म के लिए अलग कोड की व्यवस्था हो सकती है, तो देश में करोड़ों की आबादी रखने वाले आदिवासी समाज को इस अधिकार से दूर क्यों रखा जा रहा है। विधायक ने कहा कि यह सिर्फ एक कोड की बात नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के वजूद का सवाल है। जनगणना में अलग धर्म कोड की मांग रैली के दौरान बड़ी संख्या में लोग संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद लोगों ने कहा- जनगणना 2026 में अगर उन्हें अलग धर्म कोड नहीं मिला तो उनकी गिनती दूसरे धर्मों में हो जाएगी। इससे समाज की मूल पहचान खत्म होने का डर है। युवाओं में भी इस मांग को लेकर काफी जोश दिखा। उन्होंने कहा कि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। विधायक गोगरा ने कहा- अभी तो यह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर उनकी वाजिब मांगों पर गौर नहीं किया गया और आदिवासियों को उनका हक नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। समाज के प्रतिनिधियों ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें जल्द से जल्द केंद्र सरकार तक पहुंचाने की बात कही।