राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रारूप पर मंगलवार को उदयपुर संभाग स्तरीय दूसरे चरण की वर्चुअल जनसुनवाई हुई। इसका उद्देश्य आमजन से राय और सुझाव प्राप्त करना था। राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता और समान नागरिक संहिता समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा इस जनसुनवाई में वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और पारिवारिक कानूनों सहित विभिन्न विषयों पर उदयपुर संभाग के सभी जिलों के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों और आमजन से सुझाव मांगे। डूंगरपुर स्थित जिला परिषद के ईडीपी सभागार में इस वर्चुअल जनसुनवाई में जिला कलेक्टर देशलदान, एडीएम प्रकाश चंद्र रैगर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ मौजूद रहे। इनके साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, अधिवक्ता, शिक्षाविद और आमजन भी वीसी के जरिए जुड़े। नाता प्रथा पर प्रभावी रोक लगाने का सुझाव जनसुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। समाजसेवी गुरु प्रसाद पटेल ने देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत करने के लिए यूसीसी को आवश्यक बताया। उन्होंने नाता प्रथा पर प्रभावी रोक लगाने और उससे जन्मी संतानों के अधिकारों के लिए विशेष प्रावधान करने का सुझाव दिया। मन की उड़ान संस्थान की संस्थापक कामना चौबीसा ने लिव-इन रिलेशनशिप के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान, बहुविवाह पर प्रतिबंध और महिलाओं-पुरुषों को समान अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। विधवा महिलाओं के हितों की सुरक्षा पर दिया जोर अन्य सुझावों में पूजा मखीजा ने विधवा महिलाओं के हितों की सुरक्षा पर जोर दिया, जबकि सतीश जैन ने बाल विवाह पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही। सोमा लाल कोटेड ने अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधानों का सुझाव दिया। बार एसोसिएशन डूंगरपुर के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह चुंडावत ने महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के साथ उत्तराखंड की तर्ज पर अनुसूचित जनजाति वर्ग को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की। मोहम्मद इस्माइल कुरैशी और कमलेश अहारी सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए।