सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं में कुछ सालों से अलग ट्रेंड चल रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जैसी भर्तियों में माइनस अंक वाले अभ्यर्थियों का भी चयन हो गया। शून्य पर्सेंटाइल वाले भी अब मेडिकल पीजी करेंगे। पीटीईटी में 0 अंक पाने वाले अब बीएड करेंगे। पिछले 3 साल की भर्ती और प्रवेश परीक्षा के कटऑफ में ये तथ्य सामने आए हैं। कुछ सालों में पेपर के पैटर्न में बदलाव हुआ है। पेपर टफ आने से कम अभ्यर्थी पास हो रहे हैं। सीटें भरने के लिए कटऑफ कम या माइनस में जा रही है। शिक्षकों की वैंकेसी कम होने से युवाओं का बीएड से मोह भंग हो रहा है। कैटेगरी के रिजर्व पदों पर अभ्यर्थी नहीं मिलने से कटऑफ कम रहती है। 0 अंक पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी बने तो कोर्ट ने रिजल्ट रोका था -एक्सपर्ट: डॉ. धर्म सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में न्यूनतम 40% की शर्त जोड़ी तो 100% सीटें खाली रहीं