विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू), जयपुर के विधि विभाग की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की ‘चतुर्थ वीजीयू आर.के. रस्तोगी मेमोरियल नेगोशिएशन प्रतियोगिता’ की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों सहित विधिक एवं अकादमिक जगत की हस्तियों ने शिरकत की। देशभर के प्रमुख विधिक संस्थानों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और विधि संकायों की 60 टीमें प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं। उद्घाटन सत्र में विद्यार्थियों को नेगोशिएशन यानी बातचीत के जरिए समाधान निकालने, मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान की व्यावहारिक उपयोगिता से अवगत कराया गया। ‘स्वामी विवेकानंद मेरे सबसे पसंदीदा व्यक्तित्व’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. अंजारिया ने अपने संबोधन में विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी में शामिल होने को आत्मीय अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी मेरे सबसे पसंदीदा व्यक्ति हैं, इसलिए वीजीयू में इस कार्यक्रम में शामिल होना मेरे लिए बेहद आत्मीय और हृदयस्पर्शी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के सकारात्मक अकादमिक वातावरण, नवाचार और मूल्यपरक शिक्षा की सराहना की। वैकल्पिक विवाद समाधान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि न्याय का उद्देश्य केवल विवादों का कानूनी निपटारा करना नहीं, बल्कि समाज में सौहार्द और परस्पर सहमति की भावना को मजबूत करना भी है। उन्होंने युवा विधि विद्यार्थियों को पारंपरिक अदालती मुकदमों से आगे बढ़कर आपसी समझ, संवाद और सुलह के विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। नेगोशिएशन प्रतियोगिता जैसे मंच विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन में विवादों को समझने, पक्षकारों के दृष्टिकोण को सुनने और व्यावहारिक समाधान तलाशने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकते हैं।
अदालतों के बाहर समाधान से बचेगा समय और ऊर्जा समारोह के विशिष्ट अतिथि राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने अदालतों के बाहर विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकांश विवादों का निपटारा आपसी बातचीत और सहमति के जरिए किया जा सकता है। इससे संबंधित पक्षकारों का बहुमूल्य समय और ऊर्जा बचती है। वहीं, विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति आनंद ने युवा प्रतिभागियों को वैचारिक मंथन, पेशेवर नैतिकता और समस्या-समाधान की क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विधिक पेशे में केवल कानून का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि परिस्थितियों को समझने, प्रभावी संवाद करने और संतुलित निर्णय तक पहुंचने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों को इन्हीं कौशलों को व्यवहार में उतारने का अवसर मिल रहा है। क्यूबा मिसाइल संकट का उदाहरण देकर समझाई बातचीत की ताकत कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तोगी ने अतिथियों और देशभर से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने स्वर्गीय आर.के. रस्तोगी के उच्च नैतिक मूल्यों, विधिक आदर्शों और संस्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि नेगोशिएशन केवल कानूनी क्षेत्र तक सीमित कौशल नहीं है, बल्कि जीवन और समाज में संतुलन बनाए रखने का भी प्रभावी माध्यम है। संवाद की वैश्विक महत्ता को समझाने के लिए उन्होंने वर्ष 1962 के ऐतिहासिक क्यूबा मिसाइल संकट का उदाहरण दिया, जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। उन्होंने बताया कि उस समय कूटनीतिक बातचीत ने स्थिति को और गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यदि दोनों देशों के बीच संवाद सफल नहीं होता, तो दुनिया एक बड़े युद्ध के खतरे का सामना कर सकती थी। उन्होंने भारतीय संस्कृति के महाकाव्यों रामायण और महाभारत में शांति वार्ता एवं मध्यस्थता के प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, संवाद और सहमति की भूमिका प्राचीन भारतीय परंपराओं से लेकर आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक महत्वपूर्ण रही है। राजदीपक रस्तोगी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस प्रतियोगिता के माध्यम से बातचीत की बारीकियों, धैर्य और संयम को सीखें। उन्होंने कहा कि इन कौशलों का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित और सुलभ न्याय पहुंचाने में योगदान देना होना चाहिए। वीजीयू के चेयरपर्सन एवं पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. ललित के. पंवार ने स्वागत उद्बोधन में समकालीन वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया में नेगोशिएशन, वार्ता और कूटनीति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। व्यक्तिगत संबंधों से लेकर सामाजिक विवादों और अंतरराष्ट्रीय मामलों तक, बातचीत के जरिए समाधान तलाशना आवश्यक हो गया है। चतुर्थ वीजीयू आर.के. रस्तोगी मेमोरियल नेगोशिएशन प्रतियोगिता में देशभर के अग्रणी विधिक संस्थानों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और विधि संकायों की 60 टीमें हिस्सा ले रही हैं।