चुनाव आयोग ने गुरुवार को 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने का निर्देश दिया है। इनमें मध्यप्रदेश, यूपी, पंजाब , गोवा और उत्तराखंड भी शामिल हैं, यहां अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्ष देशभर में विरोध-प्रदर्शन कर रहा है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है। SSR के तहत वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़े जाएंगे और पहले से दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारी जाएंगी। 2027 में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। नाम जोड़ने, हटाने की जानकारी राजनीतिक दलों को दी जाएगी। SSR का मकसद क्या है? चुनाव आयोग के मुताबिक, SSR का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट रखना है। ताकि कोई भी पात्र नागरिक लिस्ट में नाम दर्ज कराने से न छूटे। आयोग के 15 पेज के आदेश की सबसे अहम बात यह है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर ज्यादा निगरानी होगी। SSR आदेश में SIR में छूटे नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का जिक्र नहीं चुनाव आयोग के SSR से जुड़े आदेश में SIR के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल नहीं हो पाने वाले लोगों के लिए अलग से प्रक्रिया नहीं बताई गई है। हालांकि, SIR के दौरान जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके साथ जरूरी दस्तावेज भी देने होंगे। आवेदन के आधार पर नाम अपने आप नहीं जुड़ेगा। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) पात्रता की जांच करने के बाद ही नाम जोड़ने पर फैसला करेगा। मतदान केंद्रों की संख्या और जगह की समीक्षा होगी आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या और जगह की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। एक केंद्र पर सामान्य तौर पर 1,200 से ज्यादा मतदाता नहीं होने चाहिए। नया केंद्र बनाने के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी होगी। मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े। इसके लिए हाईराइज इमारतों, रिहायशी कॉलोनियों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में सर्वे किया जाएगा। नए केंद्र की जरूरत होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी प्रस्ताव भेजेंगे। मौजूदा और नए केंद्रों की जगह का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। अधिकारियों के पद खाली नहीं रहेंगे, ट्रांसफर पर भी रोक आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि SSR के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO), सहायक ERO और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन दिए जाएं। इस दौरान CEO, DEO, ERO और AERO के पद खाली नहीं रहने चाहिए। आयोग की मंजूरी के बिना इन अधिकारियों का तबादला भी नहीं किया जा सकेगा। अगर किसी अधिकारी का तबादला जरूरी हो, तो कारण सहित प्रस्ताव आयोग को भेजना होगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत वोटर लिस्ट तैयार करने, उसमें संशोधन करने और गलतियां सुधारने में लगे अधिकारी इस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण और निगरानी में काम करेंगे। वोटरों के पते एक तय फॉर्मेट में दर्ज होंगे चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में मतदाताओं के पते एक समान तरीके से दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इससे किसी मतदाता का घर और मतदान क्षेत्र पहचानने में आसानी होगी। UP समेत 5 राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन पांचों राज्यों में SSR कराया जाएगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म होगा। मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 सीटों वाली विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म होगा। इन राज्यों में SSR का शेड्यूल बाद में आएगा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना में SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में SSR का कार्यक्रम मौसम संबंधी कारणों से बाद में घोषित किया जाएगा। SIR विवाद बिहार से शुरू हुआ, अब विपक्ष ने मुद्दा बनाया SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर विवाद 24 जून 2025 को शुरू हुआ, जब चुनाव आयोग ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया। आयोग का कहना था कि इसका उद्देश्य वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है, लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि दस्तावेजों की शर्तों और कम समय के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी कट सकते हैं। अगस्त 2025 में बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 65 लाख नाम बाहर होने के बाद विवाद और बढ़ा। इसके बाद SIR दूसरे राज्यों तक पहुंचा और नागरिकता की जांच, पुराने रिकॉर्ड की अनिवार्यता, नाम हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की शक्तियों को लेकर सवाल उठे। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने 27 मई 2026 को बिहार में SIR कराने के चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखा। सितंबर-अक्टूबर 2026 में फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा और आयोग के भीतर कथित असहमतियों को लेकर नया विवाद खड़ा हुआ। अब चुनाव आयोग ने SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में छूटे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा है। ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें…. सुप्रीम कोर्ट तक मार्च पर राहुल को नोटिस: CJI बोले- हमें कोई धमका नहीं सकता, जानते हैं कोर्ट के बाहर क्या कह रहे और अंदर क्या 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के मार्च मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी कोर्ट को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं। इन पर कोई ध्यान नहीं देता। पूरी खबर पढ़ें…