भास्कर संवाददाता| टोंक टोंक जिले से नियमानुसार बजरी भरकर बेचने के लिए जयपुर ले जाने वाले ट्रक-डंपर चालकों को पुलिस की ओर से परेशान करने का आरोप लगाते हुए बजरी विक्रेताओं ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इसको लेकर ऑल राजस्थान बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसाइटी ने मंगलवार को बरोनी में सभा भी रखी। यहां बजरी का परिवहन करने वाले चालकों ने पुलिस की तरफ से परेशान करने के अनुभव भी साझा किए गए। सोसायटी के नवीन शर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, कि नियमों के अनुसार बजरी परिवहन करने के बाद भी पुलिस ट्रक-डंपर चालकों-मालिकों को परेशान कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध बजरी ट्रकों का रवन्ना समय समाप्ति को आधार बना कर पुलिस उनसे अवैध वसूली कर रही है। अवैध वसूली का रुपया नहीं देने पर ट्रकों को थाने में बंद कर माइनिंग विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर करवाई करवा कर लाखों रुपए का जुर्माना लगवाया जा रहा है। बजरी के साथ तुल रहे पत्थर, इसस नुकसान : सोसायटी के शर्मा ने आरोप लगाया कि बजरी भरवाने के दौरान बजरी के साथ भारी तादाद में बोल्डर (पत्थर) भी भर रहे हैं। ये पत्थर भी बजरी की दर के समान 800 रुपए प्रति टन के हिसाब से दिए जा रहे हैं। इसी तरह नदी में देवली की तरफ से आ रही बजरी में ठेकेदार बजरी के साथ भारी तादाद में पानी भी ट्रकों में भर रहे हैं। जिससे वजन बढ़ जाता है। दिक्कत तब होती है, जब अपने गंतव्य तक पहुंचते-पहुंचते बजरी में रमा पानी टपक जाता है और प्रति ट्रक 2-3 टन वजन कम पड़ जाता है। उस कम पड़े वजन का हर्जाना ट्रक मालिक या चालक को जेब से भरना पड़ता है। टोंक जिले से करीब 1200 ट्रक बजरी के जयपुर बिकने जाते हैं। एक ट्रक में करीब 30 टन बजरी होती है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 36 हजार टन से अधिक बजरी टोंक जिले से जयपुर जाती है। पहले की तरह जयपुर में हो बजरी मंडी: बजरी ट्रकों के लिए जयपुर शहर व आसपास में अभी कोई निर्धारित बजरी मंडी नहीं है। जिस कारण से पुलिस बजरी ट्रकों को मंडी में बिक्री के लिए खड़े होने के दौरान उनका चालान काट रही है या थानों में बंद कर दिया जाता है या फिर चालान का डर दिखा कर अवैध वसूली की जाती है। कुछ सालों पहले तक जयपुर में बजरी की 12 मंडिया हुआ करती थी। जहां पर पुलिस किसी प्रकार से ट्रकों को परेशान नहीं करती थी।