सरकारी विभागों में लेटलतीफी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केंद्रीय जल शक्ति अभियान के तहत स्कूलों में 16 से 30 अप्रैल तक जल पखवाड़ा मनाया जाना था। हैरानी की बात यह है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इसका आदेश 25 अप्रैल को जारी किया। ऐसे में 15 दिन चलने वाले अभियान के लिए स्कूलों के पास केवल तीन दिन ही बचे हैं। इससे शिक्षा विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई है। अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक-2 अशोक कुमार मीणा ने सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला परियोजना समन्वयकों को भेजे निर्देशों में बताया कि प्रधानमंत्री की ओर से शुरू किए गए ‘जल शक्ति अभियान : कैच द रेन’ के तहत स्कूलों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जल पखवाड़ा मनाया जाना है। आदेश देरी से जारी होने के कारण अधिकांश स्कूलों को इसकी जानकारी तक नहीं मिल पाई। कई संस्था प्रधानों और शिक्षकों ने बताया कि उन्हें अब तक ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। ऐसे में अभियान के अंतिम दिनों में औपचारिकताएं पूरी करने की नौबत आ गई है। परिषद ने गतिविधियों की रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए हैं, इससे जिला स्तर पर भ्रम और बढ़ गया है। केंद्र के थे निर्देश, जवाब देने से बच रहे अधिकारी आदेश में हुई देरी को लेकर भास्कर ने जिला स्तरीय अधिकारियों से संपर्क कर कारण जानने का प्रयास किया, लेकिन मामला उच्चाधिकारियों से जुड़ा होने से सभी बचते नजर आए। निर्देशों के अनुसार पहले दिन प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों और शिक्षकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही विशेष सभाएं, एसएमसी-पीटीएम बैठकें, जल संरक्षण कार्यशालाएं तथा निबंध, चित्रकला, पोस्टर, वाद-विवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। स्कूलों की वेबसाइट और सूचना पट्टों पर भी जल संरक्षण संबंधी संदेश प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।