आशीष बाजपेयी | बांसवाड़ा/ डूंगरपुर बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिलों में गेहूं की खरीद 23 दिन में भी तेजी क्यों नहीं पकड़ पाई, किसान क्यों निराश हो रहे हैं, गेहूं के दाने की गुणवत्ता​ कितनी प्रभावित हुई है, इसे लेकर भास्कर ने मंगलवार को पड़ताल की। इसमें सामने आया कि गेहूं का दाना 15 से 60% तक टूटा, पतला और चमकविहीन है। ऐसे में सरकार खरीदने से हिचक रही है। बांसवाड़ा जिले के 9 केंद्रों पर अभी तक एक भी दाना नहीं खरीदा गया है। डूंगरपुर जिले में 1000 टन खरीद लक्ष्य के मुकाबले 2 केंद्रों में से केवल आसपुर केंद्र में 2 किसानों से 57.50 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। सागवाड़ा केंद्र पर खरीद अब तक शुरू नहीं हुई है। भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि केंद्र पर कार्मिक ड्यूटी दे रहे हैं लेकिन खरीद नहीं कर पा रहे। भास्कर ने आंबापुरा, सज्जनगढ़, घाटोल, गढ़ी-परतापुर, बागीदौरा सहित अन्य क्षेत्रों से गेहूं के सैंपल लेकर एफसीआई के केंद्रों पर जांच भी कराई। इसमें सामने आया कि अधिकांश गेहूं की गुणवत्ता 10 से 35% तक खराब है। कुछ किसानों के गेहूं की गुणवत्ता 50 से 60 प्रतिशत तक खराब है। जबकि सरकारी खरीद में अधिकतम 6 प्रतिशत तक ही छूट है। {थोड़ा टूटा दाना : 4% {सिकुड़ा-टूटा : 6% {विवेल्ड ग्रेन्स : 1% इन 6 मानकों पर होती है जांच समस्या इसलिए: डूंगरपुर में केवीके के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सीएम बलाई ने बताया, असमय बारिश और नमी बढ़ने से इस बार गेहूं के दाने पूरे विकसित नहीं हो पाए। कटाई के समय मौसम खराब रहने से दानों में चमक और भराव फिलिंग कम रह गई। इससे दाना पतला और हल्का रह गया। खेतों में नमी और समय पर सुखाई नहीं होने से भी दानों की गुणवत्ता बिगड़ी। क्षेत्र किसान गेहूं खराब नवागांव देवी सिंह राठौड़ 50% आंबापुरा नाथू 20% बोदला रणछोड़ पटेल 25% बागीदौरा कांतिलाल 22% कोहाला फेरेंग पटेल 27% सज्जनगढ़ हीरा 30% अधिकतम 100 क्विंटल गेहूं का ढेर लगवाते हैं। इससे 1-1 किलो के 2-3 सैंपल लिए जाते हैं। इनसे वापस 500-500 ग्राम के 2 सैंपल निकाले जाते हैं। इनसे भी 9 स्कूप मैथड से 50 ग्राम गेहूं अलग किया जाता है। अलग किए 50 ग्राम गेहूं को प्लेट में निकाला जाता है। प्लेट में 6 पैरामीटर पर गेहूं को जांचा जाता है और गुणवत्ता का प्रतिशत निकाला जाता है। {किसान कल्पेश ने 25 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया, उन्हें समय भी दिया गया। लेकिन उन्हें कहा गया- इंतजार करो। मंगलवार को वह तलवाड़ा केंद्र पर निराश नजर आए। {बड़ोदिया, छींच, परतापुर और गनोड़ा केंद्रों पर भी किसान लगातार पहुंच रहे हैं। लेकिन पंजीयन के बाद भी गेहूं की खरीद नहीं की जा रही। {आसपुर क्षेत्र के गोल गांव के किसान रामचंद्र मेहता ने बताया, पंजीयन के लिए केंद्र पर गया लेकिन दाना पतला बताया। साबला के वाड़ा माल के माधवसिंह बामनिया ने बताया , मेरे सैंपल में दाना 9 प्रतिशत काला और 5 प्रतिशत अधिक टूटा बताया। {सागवाड़ा की किसान विमला ने बताया, गेहूं का दाना 8 से 10 प्रतिशत पतला बताया है। इंतजार करने को कहा है। { बाहरी तत्व : 0.75% {अन्य खाद्यान्न : 2% {टूटा खाद्यान्न : 2% आगे क्या : गेहूं में औैसतन 15 से 32 प्रतिशत तक खामी मिली है। एफसीआई 6% तक कम गुणवत्ता स्वीकार कर सकती है। बांसवाड़ा एफसीआई के गुणवत्ता नियंत्रक प्रबंधक महेंद्र कुमार सोनी का कहना है, हमने 30 प्रतिशत दाने टूटने और 30 प्रतिशत चमकविहीन की छूट मांगी है। छींच केंद्र