राजस्थान के चार प्रमुख शहरों और उनसे जुड़े 28 सैटेलाइट टाउन में शहरी सुविधाएं सुधारने के लिए विश्व बैंक ने करीब 3500 करोड़ रुपए की ‘सूत्रा’ (SUTRA) परियोजना प्रस्तावित की है। 38.57 करोड़ डॉलर की इस परियोजना में जयपुर, जोधपुर, कोटा और भरतपुर के शहरी क्लस्टर शामिल होंगे। इन 32 शहरी निकायों की अनुमानित आबादी 78 लाख से अधिक है। प्रस्ताव के अनुसार, परियोजना में शहरों के आधारभूत ढांचे, परिवहन, पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर काम होगा। बढ़ती गर्मी में जल संकट और बारिश के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के उपाय भी किए जाएंगे। ठोस कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर रहेगा। निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर भी फोकस होगा परियोजना का फोकस नगर निकायों की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता मजबूत करना भी है। इसके तहत राजस्व वसूली, ऋण प्रबंधन और शहरी विकास के लिए निजी एवं वाणिज्यिक पूंजी जुटाने की क्षमता सुधारने के प्रस्ताव हैं। राजस्थान अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (आरयूआईडीपी) इसकी कार्यान्वयन एजेंसी होगी। विश्व बैंक से 27 करोड़ डॉलर ऋण और राज्य सरकार से 11.57 करोड़ डॉलर का वित्तपोषण प्रस्तावित है। परियोजना की तकनीकी डिजाइन की समीक्षा 10 दिसंबर 2026 और विश्व बैंक बोर्ड से मंजूरी 2 जुलाई 2027 तक संभावित है। भास्कर एक्सप्लेनर - जनता को 6 बड़े फायदे 1. ट्रैफिक और आवागमन में राहत: बेहतर शहरी परिवहन और कनेक्टिविटी से दफ्तर, बाजार, अस्पताल और अन्य जगहों तक पहुंचना आसान हो सकता है। यात्रा में लगने वाला समय भी घट सकता है। 2. जलभराव और गर्मी से राहत: बारिश के पानी की निकासी और जल संकट से निपटने के उपायों से प्रभावित बस्तियों को राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा परियोजना में होने वाले कामों पर निर्भर करेगा। 3. साफ-सफाई और बेहतर वातावरण: ठोस कचरा प्रबंधन सुधरने से कचरे का व्यवस्थित संग्रहण और निस्तारण बेहतर हो सकता है। इससे शहरों में गंदगी और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। 4. पर्यटन से रोजगार: ऐतिहासिक स्थलों और विरासत क्षेत्रों के विकास से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, दुकानों और स्थानीय कारोबार को फायदा मिलने की संभावना है। 5. बेहतर नागरिक सुविधाएं: शहरों के आधारभूत ढांचे में सुधार से सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और दूसरी शहरी सुविधाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। 6. नगर निकायों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी: राजस्व वसूली और वित्तीय प्रबंधन सुधरने से निकायों की विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे भविष्य में नागरिक सुविधाओं पर खर्च करने की गुंजाइश बनेगी।