शारदीय नवरात्र में इस बार महाअष्टमी और महानवमी की पूजा 19 अक्टूबर को एक ही दिन होगी। अष्टमी तिथि सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। इस संयोग में श्रद्धालु एक ही दिन मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करेंगे। इसी दिन कन्या पूजन होगा। हवन होगा। नवरात्र के धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति होगी। ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश नारायण शास्त्री ने बताया, महानवमी पर दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के साथ हवन होगा। अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी होंगे। नौ दिनों तक व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे। कन्या पूजन करेंगे। हवन की पूर्णाहुति के बाद व्रत का पारण करेंगे। अष्टमी और नवमी के संधिकाल में संधि पूजा का भी विशेष महत्व है। नवरात्र में कन्या पूजन की परंपरा के तहत छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजन किया जाएगा। श्रद्धालु कन्याओं के चरण पखारेंगे। चुनरी ओढ़ाएंगे। हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाएंगे। इसके बाद दक्षिणा देंगे। आशीर्वाद लेंगे। पं. शास्त्री के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।