30 साल बाद आमेर महल के गणेश पोल का मूल स्वरूप लौटेगा। 13 साल पहले विश्व विरासत में शामिल हुए महल के सबसे प्रमुख पोल के दोनों तरफ की दीवारों पर दिख रहा पीला रंग हटेगा और लाल पत्थरों की 16-16 मीटर लंबी और 8-8 मीटर ऊंची दीवारें पुराने स्वरूप में नजर आएंगी। आमेर महल बनने के बाद लाल किले में इस्तेमाल हुए पत्थरों की तर्ज पर इस दीवार का निर्माण हुआ था। लेकिन 30 साल पहले तत्कालीन पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने विरासत के साथ छेड़छाड़ कर इस पर रंग चढ़ा दिया। इसका खुलासा हाल ही में मानसूनी बारिश ने किया। जानकार बताते हैं कि पूरे आमेर महल का रंग पीला था, इसलिए बिना-सोचे समझे इन पत्थरों पर पीला रंग दिया गया। गाइड बोले- रंग तो बदला ही, रैंप भी तोड़ दिए 45 साल से पुरातत्व विभाग के अधिकृत गाइड भंवर सिंह ने बताया कि गणेश पोल की दोनों दीवारों का न केवल रंग बदला गया, बल्कि रैंप भी तोड़े गए। कभी बहुत सुंदर दिखने वाला गणेश पोल आज पूरी तरह बुझा हुआ नजर आता है। गाइड अमरनाथ झा के मुताबिक गणेश पोल के दोनों तरफ लाल पत्थर लगे थे, जो दीवान-ए-आम पत्थरों की तरह थे। दीवारें बहुत सुंदर दिखती थीं। इसका मूल स्वरूप लौटेगा तो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। पढ़िए लाल पत्थरों के पीले होने की कहानी... हाल ही में हुई तेज बारिश के बाद बीते ढाई साल से आमेर महल के अधीक्षक का कार्यभार देख रहे राकेश छोलक निरीक्षण कर रहे थे। उनकी नजर गणेश पोल की दीवारों पर पड़ी, जिनसे कहीं-कहीं पीला रंग उतर गया था। उन्होंने थोड़ा-सा कुरेदा तो लाल पत्थर नजर आया, जो कुछ मीटर दूर दीवान-ए-आम से मेल खाता दिखा। गाइडों से बात कर गहराई से जांच की तो 30 साल पहले के कुछ फोटो मिले, जिसमें लाल पत्थर की दीवार नजर आ रहा थी। उन्होंने इसकी जानकारी आला अफसरों को दी। विभाग ने सैंपल और फोटो के आधार कमेटी बनाकर पड़ताल कराई। रिपोर्ट में सामने आया कि लाल पत्थरों की दीवार पर बिना-सोच समझे खमीरा यानी पीला रंग कर दिया गया, जो गलत था। कमेटी ने रंगों के सैंपल भी लिए। {अब विभाग ने आमेर डेवलपमेंट बोर्ड एडमा को महल में चल रहे बाकी काम के साथ इस पीले रंग को हटाकर मूलस्वरूप लौटाने के आदेश दिए हैं। अगले कुछ दिनों में काम शुरू हो जाएगा।