बांसवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित नए न्यायालय परिसर के मुख्य द्वार पर मंगलवार दोपहर को वकीलों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाओं के भारी अभाव और बिना पर्याप्त इंतजामों के ही जल्दबाजी में कोर्ट को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। 27 अगस्त से नई कोर्ट बिल्डिंग में कामकाज शुरू हुआ है, लेकिन मूलभूत व्यवस्थाएं न होने के कारण वकील उसी दिन से लगातार न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर रहे हैं। बार एसोसिएशन बांसवाड़ा के अध्यक्ष जयेंद्र कुमार पुरोहित के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में वकीलों की मुख्य मांग पुरानी कलेक्ट्रेट परिसर स्थित लाइब्रेरी की करीब 10 लाख रुपए कीमत की किताबों के सुरक्षित रखरखाव को लेकर है। इसके साथ ही वकील नए परिसर में अपने बैठने के लिए कम से कम तीन बड़े हॉल और एक सर्वसुविधायुक्त लाइब्रेरी स्पेस देने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन और जिला जज का ध्यान आकर्षित करने और उन्हें सद्बुद्धि देने के उद्देश्य से वकीलों ने परिसर में यज्ञ का आयोजन भी किया। नए न्यायालय भवन में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि वकीलों और पक्षकारों के लिए पर्याप्त कमरे और कुर्सियां तक उपलब्ध नहीं हैं। परिसर में टिनशेड के नीचे भी मूलभूत सुविधाएं गायब हैं, जिससे इस भीषण गर्मी और धूप में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा, परिसर के भीतर पीने के पानी और साफ-सुथरे शौचालयों का कोई उचित प्रबंध नहीं किया गया है, जिससे दैनिक कार्य में काफी बाधा आ रही है। मामले में बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के जज और रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर सभी समस्याओं से अवगत कराया है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुए इस आंदोलन को अब पूरे संभाग और प्रदेशभर के वकीलों का समर्थन मिलने लगा है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा और यदि प्रशासन ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।