डूंगरपुर नगर निकाय चुनाव के बीच कांग्रेस विधायक एवं जिलाध्यक्ष गणेश घोघरा ने भाजपा पर संभावित हार से घबराकर धनबल, दबाव और पार्षदों की खरीद-फरोख्त की राजनीति करने का आरोप लगाया है। घोघरा ने दावा किया कि वार्ड नंबर 28 के पार्षद समेत कई कांग्रेस से जुड़े पार्षदों पर दबाव बनाया गया और उन्हें खरीदने की कोशिश की गई। उन्होंने परिवार के जरिए दबाव और धमकियां देने का भी आरोप लगाया। वहीं, भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) को भाजपा की ‘सेकंड पार्टी’ और ‘बी-टीम’ बताते हुए कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए रणनीति के तहत प्रत्याशी उतारने का आरोप लगाया। विकास किया है तो जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ें- घोघरा घोघरा ने कहा कि यदि भाजपा ने वास्तव में डूंगरपुर में विकास किया है तो उसे जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए। पार्षदों को डराने-धमकाने और खरीद-फरोख्त का सहारा लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर डूंगरपुर में पिछले 35 सालों से भ्रष्टाचार और मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शहर की जनता अब सब समझ चुकी है। इस दौरान पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, असरार अहमद, कांग्रेस से नगर परिषद के सभापति प्रत्याशी भरत नागदा, महामंत्री नारायण पंड्या समेत कई कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। BAP पर भी निशाना, कांग्रेस के प्रभाव वाले वार्डों में उतारे प्रत्याशी घोघरा ने बीएपी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने बीएपी को भाजपा की ‘सेकंड पार्टी’ और ‘बी-टीम’ बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के प्रभाव वाले वार्डों में नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से प्रत्याशी उतारे गए हैं। विधायक ने सवाल उठाया कि यदि बीएपी वास्तव में आदिवासियों की हितैषी पार्टी है तो उसने नगर निकाय के सभी 40 वार्डों में प्रत्याशी क्यों नहीं उतारे। 9 सितंबर को वोट से जवाब देने की अपील घोघरा ने कहा कि 9 सितंबर का मतदान सिर्फ पार्षद चुनने का चुनाव नहीं है, बल्कि गरीबों के अधिकार, लोकतंत्र और शहर के विकास की दिशा तय करने की लड़ाई है। उन्होंने मतदाताओं से कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने की अपील की। घोघरा ने कहा कि जनता अपने एक वोट से भाजपा की कथित दबाव और धनबल की राजनीति का जवाब दे सकती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की जीत के बाद रुके हुए विकास कार्यों को गति दी जाएगी और भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर किया जाएगा।