हनुमानगढ़ जिले के पल्लू तहसील क्षेत्र में बारिश नहीं होने से खरीफ (सावणी) फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। पूर्व जिला परिषद सदस्य गौरीशंकर थोरी ने कई गांवों के खेतों का निरीक्षण कर फसल खराबे का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पल्लू तहसील में बिना बारिश के 80 फीसदी से ज्यादा फसल नष्ट हो चुकी है, जिससे किसान चिंतित हैं। थोरी ने जानकारी दी कि करीब 6-7 दिन पहले किसानों ने तहसील कार्यालय पर धरना दिया था। उन्होंने प्रशासन को फसल खराबे की जानकारी दी थी। किसानों की मांग है कि पल्लू तहसील को सूखाग्रस्त घोषित कर विशेष गिरदावरी करवाई जाए। इसके साथ ही, फसल बीमा कंपनियों को खराब हुई फसल का कम से कम 25 फीसदी भुगतान तुरंत किसानों को करने के लिए कहा जाए। किसानों के सामने आर्थिक संकट थोरी ने बताया कि खेतों की मौजूदा स्थिति बहुत खराब है। बारिश नहीं होने से ग्वार, मूंग, मोठ, बाजरा और मूंगफली जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों के मुताबिक, ज्यादातर खेतों में 80 फीसदी से ज्यादा फसल खराब हो चुकी है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। थोरी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान किसानों ने देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य व्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभाई थी। आज वही किसान बारिश न होने से अपनी फसल बर्बाद होते देख चिंतित हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पल्लू तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अगले 3-4 दिन में विशेष गिरदावरी शुरू करवाकर पल्लू तहसील को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो हजारों किसान और युवा पल्लू तहसील कार्यालय पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव डालेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। निरीक्षण के दौरान मालासर, स्वरूपदेसर, लाडम, घणीयासर, रत्नदेशर, दूधली और नैयासर समेत कई गांवों के खेतों में फसल की स्थिति देखी गई। इस मौके पर समाजसेवी अनिरुद्ध जोशी, मंगलाराम बिजारणिया और राकेश सियाग भी मौजूद थे।