मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित डुमना एयरपोर्ट की 450 करोड़ रुपए की लागत से बनी नई टर्मिनल बिल्डिंग से पानी टपक रहा है। इससे गेट के पास का फर्श गीला और फिसलन भरा हो गया। एयरपोर्ट प्रबंधन को मेन गेट बंद करना पड़ा। दूसरे गेट से आवाजाही कराई। यात्रियों को फिसलन से बचाने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन ने मुख्य गेट पर ‘फर्श गीला है, संभलकर चलें’ की चेतावनी वाला बोर्ड लगाया। बारिश के दौरान यात्रियों को टर्मिनल में आने-जाने में परेशानी हुई। नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन 10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। बारिश के कारण कैनोपी में पानी भरा एयरपोर्ट प्रभारी डायरेक्टर नीरज कुमार ने बताया- बारिश के कारण कैनोपी में पानी भर गया था। कैनोपी की रिपेयरिंग चल रही है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए D-1 गेट बंद कर D-2 गेट से आवाजाही कराई जा रही है। जून 2024 में फैब्रिक कैनोपी गिरने की घटना की जांच चल रही है। एनकेजी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई भी मुख्यालय स्तर पर चल रही है। वर्तमान में कैनोपी की रिपेयरिंग दूसरी कंपनी को दी गई है। इसी कैनोपी में बारिश के दौरान पानी भरने और टपकने की समस्या सामने आई है। NKG इंफ्रास्ट्रक्चर ने किया था निर्माण डुमना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन, एटीसी टावर और फायर स्टेशन समेत आधुनिकीकरण का काम दिल्ली की मेसर्स एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया था। टर्मिनल भवन 1.15 लाख वर्गफुट क्षेत्र में बनाया गया। 450 करोड़ रुपए खर्च, फिर भी बारिश में दिक्कत वायु सेवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने बताया- एयरपोर्ट के निर्माण और वर्तमान व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच और ऑडिट हो। करीब 450 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद यात्रियों को प्रवेश करते ही गीले फर्श और टपकते पानी का सामना करना पड़ना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा- किसी भी शहर के लिए एयरपोर्ट उसकी पहली छवि बनाता है, लेकिन एयरपोर्ट की सुविधाएं और रैंकिंग सवालों के घेरे में हैं। हालिया कस्टमर सेटिस्फेक्शन इंडेक्स में जबलपुर एयरपोर्ट को देशभर में 22वां स्थान मिला है। 2 साल पहले भी गिर चुकी है फैब्रिक कैनोपी डुमना एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग की निर्माण गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। 27 जून 2024 को भारी बारिश के दौरान ड्रॉप एंड गो एरिया की फैब्रिक कैनोपी का एक हिस्सा गिर गया था। कैनोपी का हिस्सा वहां खड़ी आयकर विभाग के एक अधिकारी को लेने आई कार पर गिरा था, जिससे कार क्षतिग्रस्त हो गई थी। हादसे से कुछ मिनट पहले ही अधिकारी और ड्राइवर कार से उतरकर टर्मिनल के अंदर चले गए थे। इससे वे हादसे की चपेट में आने से बच गए और बड़ा हादसा टल गया। 1.15 लाख वर्गफीट में है टर्मिनल नए टर्मिनल की आधारशिला 13 अगस्त 2018 को रखी गई थी। करीब 1.15 लाख वर्गफीट में बने इस टर्मिनल के साथ एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, टैक्सीवे, एप्रन और पार्किंग की सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां 300 कारों की पार्किंग की व्यवस्था है। टर्मिनल में एक बार में करीब 800 यात्रियों को संभालने की क्षमता है। यात्रियों के लिए चेक-इन काउंटर, बैगेज स्क्रीनिंग सिस्टम, एक्स-रे मशीन, एलीवेटर, एस्केलेटर, फायर फाइटिंग सिस्टम, डिस्प्ले बोर्ड और सार्वजनिक शौचालय समेत कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। एयरपोर्ट के विस्तार के बाद भी 7 फ्लाइट डुमना एयरपोर्ट के विस्तार के बाद यहां से उड़ानों की संख्या बढ़ने का दावा किया गया था। हालांकि, फिलहाल एयरपोर्ट से सात फ्लाइट संचालित हो रही हैं। इनमें इंदौर, हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की उड़ानें शामिल हैं। बिलासपुर और जगदलपुर की फ्लाइट फिलहाल बंद हो चुकी हैं। यात्रियों की क्षमता बढ़कर 800 हुई थी नई टर्मिनल बिल्डिंग के शुरू होने से एयरपोर्ट की यात्री क्षमता बढ़कर 800 यात्री प्रति घंटे हो गई थी। 1,15,315 वर्गफुट क्षेत्र में बने टर्मिनल भवन में तीन एयरोब्रिज, आधुनिक बैगेज स्क्रीनिंग सिस्टम, लैंडस्केप एरिया, फूड कोर्ट और कार पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल की गई थीं। 2015 में MP सरकार ने दी थी जमीन जबलपुर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 2015 में 483 एकड़ जमीन दी थी। जमीन मिलने के बाद एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 774 एकड़ हो गया था। नए टर्मिनल के निर्माण में 412 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था। नए टर्मिनल के निर्माण के बाद एयरपोर्ट पर रात में भी फ्लाइट लैंडिंग की सुविधा शुरू हुई थी। यहां से पांच शहरों के लिए सीधी उड़ानें भी संचालित की जा रही थीं। ………………………………………. यह खबर भी पढ़ें भोपाल से श्रीनगर, चेन्नई-केरल के लिए उड़ेंगे प्लेन अगले कुछ महीनों में भोपाल एयरपोर्ट से श्रीनगर, चेन्नई, केरल, देहरादून, कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़-जम्मू समेत अन्य बड़े शहरों के लिए प्लेन उड़ सकते हैं। सांसद आलोक शर्मा की मीटिंग के बाद सरकार ने एयरलाइंस ऑपरेटरों से प्रपोजल मांगें हैं। पढ़ें पूरी खबर…