जयपुर में साइबर ठगों ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर कंपनी के अकाउंटेंट से 6 करोड़ 80 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने कंपनी के अकाउंटेंट के कंप्यूटर में मौजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर वॉट्सएप वेब तक पहुंच बनाई। इसके बाद कंपनी निदेशक का नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर बदमाशों ने अपने नंबर डाल दिए। इसके बाद अकाउंटेंट को फर्जी मैसेज भेजे थे। आरोपियों ने अकाउंटेंट से RTGS के जरिए यह रकम ट्रांसफर कराई थी। सिंगापुर और हांगकांग में बैठे मास्टरमाइंड ने 250 खातों में इस रकम को ट्रांसफर करते हुए एटीएम, बैंक से रुपए निकलवाए थे। स्टेट साइबर पुलिस ने ‘बॉस स्कैम’ ठगी का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों मयंक कसौटिया निवासी जयपुर, बृजमोहन द्रोण उर्फ लक्की निवासी जयपुर, समानाराम निवासी कुचामन डीडवाना और मोहित यादव उर्फ मोती निवासी जिला सीकर को गिरफ्तार किया है। वहीं पुलिस ने ठगी की रकम में से करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपए विभिन्न बैंक खातों में होल्ड करवाए हैं। कंप्यूटर की तकनीकी खामी का उठाया फायदा एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया- जयपुर की एक निजी कंपनी के अकाउंटेंट ने सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस थाने में 25 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि 24 अगस्त को साइबर ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट के कंप्यूटर में मौजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर वॉट्सएप तक पहुंच बनाई। इसके बाद आरोपियों ने कंपनी निदेशक का नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हुए अकाउंटेंट को वॉट्सएप पर मैसेज भेजे। आरोपियों ने खुद को कंपनी का निदेशक बताते हुए तुरंत RTGS के जरिए भुगतान करने के निर्देश दिए थे। असली डायरेक्टर की पुरानी चैट की बनाई नकल आरोपियों ने अकाउंटेंट के कंप्यूटर में मौजूद वॉट्सएप की कॉन्टेक्ट लिस्ट से कंपनी के ओरिजनल निदेशक का नंबर हटाकर अपने नंबर को उसी नाम और प्रोफाइल फोटो के साथ जोड़ दिया। वहीं साइबर ठगों ने निदेशक और अकाउंटेंट के बीच पहले हुई बातचीत की नकल भी तैयार कर दी। इससे अकाउंटेंट को विश्वास हो गया कि वह कंपनी के वास्तविक निदेशक से ही वॉट्सएप पर बातचीत कर रहा है। आरोपियों के निर्देश पर अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से कुल 6 करोड़ 80 लाख रुपए तीन बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए थे। 1930 टीम की मदद से 3.50 करोड़ बचाए ठगी की जानकारी मिलते ही सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस और नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 की टीम सक्रिय हुई। पुलिस ने बैंकिंग लेन-देन पर कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम को ट्रेस करना शुरू किया। दोनों के संयुक्त प्रयासों से करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपए विभिन्न खातों में होल्ड करवाए गए। अब इस रकम को पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है। USDT में बदलकर विदेश भेजते थे रकम जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर करने के बाद USDT (बिट कॉइन) में बदला जाता था। इसके जरिए रकम को विदेश तक पहुंचाने का काम किया जाता था। पुलिस को जांच के दौरान विदेश में बैठे गिरोह के मुख्य संचालकों के साथ आरोपियों के संपर्क के भी संकेत मिले हैं। पुलिस को बैंक से मिले लेन-देन संबंधी इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) पतों की जांच में सामने आया कि रकम म्यूल बैंक खातों में पहुंचने के बाद सिंगापुर और हांगकांग में बैठे गिरोह के मास्टरमाइंड इंटरनेट बैंकिंग के जरिए उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर रहे थे। इसके बाद रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग बैंक खातों, QR कोड और डिजिटल माध्यमों से घुमाया गया। टेलीग्राम ग्रुप से बैंक खाते, सिम और ATM की व्यवस्था साइबर गिरोह के बदमाश टेलीग्राम के अलग-अलग समूहों के जरिए बैंक खाते, ATM, सिम और पासबुक की व्यवस्था करते थे। जांच में सामने आया कि एक बैंक खाते की किट के लिए करीब 10 से 15 हजार रुपए तक दिए जाते थे। खातों में ठगी की रकम पहुंचने के बाद उसे तुरंत दूसरे बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों से आगे भेज दिया जाता था। इस प्रक्रिया में अलग-अलग लोगों की भूमिका तय रहती थी। हर आरोपी की अलग-अलग भूमिका 250 से ज्यादा खातों की जांच, नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश पुलिस इसकी जांच कर रही है कि ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची। इन खातों को संचालित करने वाले लोग कौन हैं। विदेश में बैठे गिरोह के मुख्य संचालकों से गिरफ्तार आरोपियों के क्या संबंध हैं। कार्रवाई डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर अपराध पुलिस स्टेशन जयपुर की टीम ने की। कार्रवाई थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा और उप अधीक्षक पुलिस के नेतृत्व में हुई।