जयपुर नगर निगम चुनाव-2026 में नामांकन पत्रों की जांच के बाद कई वार्डों की चुनावी तस्वीर बदल गई है। कांग्रेस को वार्ड नंबर-111 में बड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी प्रत्याशी ज्वाला प्रसाद का नामांकन खारिज कर दिया गया। वहीं वार्ड नंबर-146 में भाजपा प्रत्याशी का नामांकन दाखिल नहीं होने से कांग्रेस के सामने भाजपा का कोई अधिकृत उम्मीदवार मैदान में नहीं है। दूसरी ओर टिकट वितरण को लेकर भाजपा में नाराजगी भी खुलकर सामने आ गई है। सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर- 98 के कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर सुभाष सिंघी को टिकट दिए जाने का विरोध किया। 5 साल से अधिक सजा वाले मामले में आरोप तय, नामांकन निरस्त वार्ड नंबर-111 से कांग्रेस प्रत्याशी ज्वाला प्रसाद का नामांकन जांच के दौरान खारिज कर दिया गया। नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी में सामने आया कि उनके खिलाफ एक ऐसा आपराधिक मामला विचाराधीन है, जिसमें 5 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है। सक्षम न्यायालय इस मामले में अपराध का संज्ञान ले चुका है और ज्वाला प्रसाद के खिलाफ 29 अगस्त 2024 को आरोप भी तय किए जा चुके हैं। इसी आधार पर रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। नामांकन खारिज होने के बाद वार्ड नंबर-111 में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को झटका लगा है और अब पार्टी के सामने इस वार्ड के बदले हुए राजनीतिक समीकरण से निपटने की चुनौती होगी। वार्ड-146 में भाजपा प्रत्याशी ने नहीं भरा पर्चा वहीं वार्ड नंबर-146 में स्क्रूटनी के बाद चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। भाजपा की जारी सूची में अफसाना का नाम पार्टी प्रत्याशी के रूप में शामिल था, लेकिन उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया। ऐसे में इस वार्ड में भाजपा का कोई अधिकृत प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है। कांग्रेस ने वार्ड नंबर-146 से अफरोज को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा प्रत्याशी के नामांकन नहीं भरने के बाद यहां चुनावी मुकाबले के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। अब यह देखना होगा कि भाजपा इस वार्ड में किसी अन्य उम्मीदवार को समर्थन देती है या फिर पार्टी की रणनीति क्या रहती है। वार्ड- 98 के कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन उधर, टिकट वितरण को लेकर भाजपा के भीतर भी नाराजगी सामने आई है। सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर-98 के कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए सुभाष सिंघी को टिकट दिए जाने का विरोध किया। नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी ने वार्ड में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर एक ऐसे उम्मीदवार को टिकट दे दिया, जो पहले वार्ड की गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहे। कार्यकर्ताओं ने इसे पैराशूट उम्मीदवार को टिकट देने का फैसला बताते हुए टिकट पर पुनर्विचार की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट चयन के लिए बनाए गए पैनल में तीन नाम शामिल थे और सभी दावेदारों से पार्टी की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन भी कराए गए थे। इसके बावजूद पैनल में शामिल किसी भी दावेदार को टिकट नहीं दिया गया। इसी फैसले को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। नगर निगम चुनाव में नामांकन और स्क्रूटनी की प्रक्रिया के साथ ही अब पार्टियों के सामने नए राजनीतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस को वार्ड-111 में प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने से झटका लगा है, दूसरी तरफ वार्ड-146 में भाजपा प्रत्याशी के मैदान से बाहर रहने से मुकाबला बदल गया है। वहीं वार्ड- 98 में टिकट वितरण को लेकर भाजपा के भीतर उठे विरोध के सुर पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन गए हैं।