झालावाड़ जिला जेल में शुक्रवार को रक्षाबंधन पर्व मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में बहनों ने जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधी। जेल प्रशासन ने इस अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की थीं। जेल में लगभग 500 बंदी हैं। रक्षाबंधन के मद्देनजर जेल प्रशासन ने बंदियों की बहनों को राखी बांधने के लिए विशेष इंतजाम किए। सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां अपने भाइयों को राखी बांधने जेल पहुंच रही थीं। मुख्य द्वार पर एक साथ तीन-चार बंदियों को उनकी बहनों से मिलवाने और राखी बंधवाने की व्यवस्था की गई थी। जेल डीवाईएसपी रोहित कौशिक ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को अपने भाइयों से मिलकर राखी बांधने के लिए सुव्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराई गई। कई बहनें 50 से 100 किलोमीटर दूर से अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं। बारिश की आशंका को देखते हुए जेल प्रशासन ने बाहर टेंट लगवाया और पेयजल के लिए कैंपर की व्यवस्था भी की। सुरक्षा बनाए रखने के लिए झालावाड़ पुलिस का जाब्ता भी तैनात रहा। बहनों ने जेल में बंद अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनका मुंह मीठा करवाया। इस दौरान कई बहनों ने अपने भाइयों को समझाया और उनसे यह वचन लिया कि वे जेल से बाहर निकलने के बाद ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे, जिससे उन्हें या उनके परिवार को दोबारा इस तरह सलाखों के पीछे रक्षाबंधन मनाना पड़े। बहनों ने भाइयों को नए जीवन की शुरुआत करने और परिवार के साथ खुशहाल जीवन जीने की प्रेरणा दी। कुछ बंदी ऐसे भी थे जो लंबे समय से जेल में बंद हैं। लंबे अंतराल के बाद अपनी बहनों को सामने देखकर उनके चेहरों पर भी भावुकता स्पष्ट दिखाई दी। राखी बांधने के बाद जब बहनें वापस लौटने लगीं, तो भाई-बहन दोनों की आंखें नम हो गईं। भाई-बहन के बीच लोहे की सलाखें कर रही थी भावुक
एक ओर जेल के अंदर भाई थे तो दूसरी ओर बाहर बैठी बहनें थीं और दोनों के बीच लोहे की सलाखें दीवार बनी हुई थीं। रक्षाबंधन के इस पवित्र बंधन के बीच यह दृश्य हर किसी को भावुक कर रहा था। कई बहनों ने अपने भाइयों से कहा कि जब वे जेल से बाहर आएं तो गलत रास्ते को छोड़कर नए जीवन की शुरुआत करें और अगला रक्षाबंधन परिवार के साथ घर पर मनाएं। इस दौरान बहनों के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी और बिछड़ने का दर्द दोनों दिखाई दिया। रक्षाबंधन के मौके पर मुस्लिम बहनों ने भी जेल में बंद अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इससे भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश भी नजर आया। धर्म और परिस्थितियों से परे भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का यह पर्व जेल परिसर में मानवीय संवेदनाओं की ऐसी तस्वीर छोड़ गया, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
रक्षाबंधन पर भाई-बहन के प्रेम से महका कस्बा, बाजारों में रही रौनक
शहर समेत ग्रामीण कस्बे सहित पूरे क्षेत्र में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही घरों में त्योहार को लेकर उत्साह नजर आया। बहनों ने शुभ मुहूर्त में भाइयों के मंगल तिलक कर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर स्नेह जताया। ग्रामीणों ने पर्व के अवसर पर सबसे पहले मंदिर पहुंचकर अपने इष्टदेव को रक्षा सूत्र अर्पित किए और पूजा-अर्चना की। घर-घर श्रवणजी की पूजा की गई। त्योहार को लेकर कस्बे के बाजारों में दिनभर चहल-पहल और रौनक बनी रही। राखी, मिठाई, नारियल सहित अन्य सामग्री की दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ रही। रक्षाबंधन के चलते बसों में भी यात्रियों की अच्छी भीड़ नजर आई। बहनें भाइयों को राखी बांधने के लिए दूर-दराज से अपने मायके पहुंचीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में पर्व को लेकर उत्साह दिखाई दिया। इसी दौरान खानपुर इलाके के सूमर कस्बे के शिव पार्क महाकालेश्वर मंदिर पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और महाकालेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।