झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं है, बल्कि परिसीमन, बगावत, जातीय समीकरण और निर्दलीयों की ताकत भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगी। 60 वार्डों, 96,555 मतदाताओं और 262 उम्मीदवारों के बीच हो रहे इस चुनाव में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना नहीं है। पॉलिटिकल एनालिसिस अनीश खान ने बताया- इस बार नगर परिषद का बोर्ड बनाने में निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने 60 में से 34 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा केवल 10 सीटों पर सिमट गई थी और 16 निर्दलीय विजयी हुए थे। लेकिन छह साल बाद बदले राजनीतिक हालात कांग्रेस के लिए पहले जैसे अनुकूल नजर नहीं आ रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा को पिछली बार की तुलना में लाभ मिलने के संकेत हैं, हालांकि बहुमत का आंकड़ा उसके लिए भी आसान नहीं माना जा रहा। परिसीमन ने बदल दिया पूरा चुनावी गणित इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर परिसीमन माना जा रहा है। वार्डों के नए परिसीमन में कई अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों का पुनर्गठन हुआ है। दो-दो वार्डों के हिस्सों को मिलाकर नए वार्ड बनाए गए, जिससे पहले जैसा अल्पसंख्यक प्रभाव कई सीटों पर कम हुआ है। राजनीतिक विश्लेषक अनीश खान का मानना है कि पिछली परिषद में जहां करीब 25 अल्पसंख्यक पार्षद चुने गए थे, इस बार उनकी संख्या घटकर लगभग 18 तक रह सकती है। वहीं नगर परिषद सीमा में आसपास के गांव शामिल होने से जाट समाज का प्रभाव बढ़ा है। इसके चलते जाट समाज के पार्षदों की संख्या 15 से बढ़कर 18 तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। यानी इस बार चुनाव केवल पार्टी नहीं, बल्कि बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों पर भी लड़ा जा रहा है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती - बगावत और बदले वार्ड कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परेशानी केवल विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही नेता बन गए हैं। टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने कांग्रेस के ही बागी मैदान में उतर गए। दस से अधिक वार्ड ऐसे हैं, जहां कांग्रेस का सीधा मुकाबला अपने ही पूर्व पदाधिकारियों, पूर्व पार्षदों या बागी नेताओं से है। इसके साथ परिसीमन ने भी कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक को प्रभावित किया है। जिन वार्डों में पहले पार्टी मजबूत मानी जाती थी, वहां अब मतदाताओं का सामाजिक संतुलन बदल चुका है। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में कांग्रेस की सीटें 34 से घटकर 25 से 28 तक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। भाजपा को फायदा, लेकिन राह उसके लिए भी आसान नहीं भाजपा को इस बार परिसीमन का लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। बदले वार्डों और नए सामाजिक समीकरणों से पार्टी को अतिरिक्त बढ़त मिलने की उम्मीद है। हालांकि टिकट वितरण के दौरान स्थानीय नेताओं के बीच खींचतान और कई वार्डों में बगावत ने भाजपा की राह भी आसान नहीं रहने दी। कई स्थानों पर अधिकृत प्रत्याशियों के सामने भाजपा के असंतुष्ट नेता ही चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी की संभावना तो है, लेकिन पार्टी के लिए भी स्पष्ट बहुमत हासिल करना कठिन माना जा रहा है। राजनीतिक आकलन भाजपा को 15 से 20 सीटों तक पहुंचता देख रहे हैं। निर्दलीय फिर बन सकते हैं सत्ता की चाबी झुंझुनूं की नगर परिषद राजनीति में निर्दलीयों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। 2019 में 16 निर्दलीय जीतकर आए थे। इस बार भी बगावत के कारण बड़ी संख्या में प्रभावशाली निर्दलीय मैदान में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निर्दलीयों की संख्या पिछले चुनाव के आसपास ही रह सकती है। यदि किसी दल को बहुमत नहीं मिला तो बोर्ड गठन में यही निर्दलीय सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। इतिहास भी इसकी पुष्टि करता है। वर्ष 2014 में भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से नगर परिषद में बोर्ड बनाया था। इस बार भी चुनाव परिणाम त्रिशंकु रहे तो सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में ही होगी। सभापति की दौड़ भी बदलेगी समीकरण नगर परिषद में सभापति पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। बदले सामाजिक समीकरणों को देखते हुए राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस बार भी सभापति की दौड़ मुख्य रूप से जाट और अल्पसंख्यक समाज के प्रभावशाली चेहरों के इर्द-गिर्द घूम सकती है। हालांकि अंतिम फैसला चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन के बाद बनने वाले समीकरण तय करेंगे। 2019 जैसा जनादेश मुश्किल इस चुनाव में सबसे बड़ा अंतर यह है कि 2019 में कांग्रेस के पक्ष में स्पष्ट माहौल था, जबकि इस बार तस्वीर पूरी तरह बदली हुई है। दोनों प्रमुख दल बगावत से जूझ रहे हैं। परिसीमन ने पारंपरिक वोट बैंक का गणित बदल दिया है और हर वार्ड में स्थानीय समीकरण अलग हैं। इसी वजह से इस बार किसी एक दल के लिए स्पष्ट बहुमत का रास्ता कठिन दिखाई दे रहा है। मुकाबला पहले से ज्यादा करीबी होने की संभावना है और कुछ सीटों पर बहुत कम अंतर से हार-जीत तय हो सकती है। इनके बीच मुकाबला झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव 2026 में कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय लोगों के बीच दमदार मुकाबला होगा। वहीं परिसीमन और बगावत उम्मीदवार के साथ-साथ सामाजिक समीकरण भी जीत तय करेंगे।