नगर परिषद चुनाव में नाम वापसी और चुनाव चिह्न मिलने के बाद अब चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। 60 वार्डों में ज्यादातर जगह मुकाबला तीन या उससे ज्यादा प्रत्याशियों के बीच है। वहीं 8 वार्ड ऐसे हैं। जहां मुकाबला सीधे दो प्रत्याशियों के बीच रह गया है। इनमें 6 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि 2 वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों को निर्दलीय और बागी प्रत्याशी चुनौती दे रहे हैं। सीधे मुकाबले वाले इन वार्डों में हर वोट महत्वपूर्ण हो गया है। प्रत्याशी अब आमने-सामने प्रचार में जुट गए हैं। सीधे मुकाबले वाले वार्ड क्यों अहम इन 8 वार्डों में सिर्फ दो प्रत्याशी होने से वोट कई उम्मीदवारों में बंटने की संभावना कम है। ऐसे में प्रत्याशी का अपना प्रभाव, पार्टी संगठन, बूथ पर तैयारी और मतदान प्रतिशत हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाएगा। इसी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों इन सीटों पर पूरा जोर लगा रही हैं।