नगरीय निकाय के लिए नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। प्रदेश के 41 जिलों के 10245 वार्डों में अब कुल 38891 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे। पिछली बार 196 निकायों में करीब 27 हजार प्रत्याशीज मैदान में थे। उधर इस महा-मुकाबले के मैदान सजने से पहले ही प्रदेश के विभिन्न निकायों में 77 उम्मीदवार निर्विरोध पार्षद चुने जा चुके हैं। प्रदेश भर में स्क्रूटनी के दौरान 17़137 नामांकन पत्र तकनीकी खामियों के चलते खारिज कर दिए गए। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के डैमेज कंट्रोल और बागियों को मनाने की कवायद भी रंग लाई, जिसके चलते पूरे प्रदेश में 10112 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए। अब मैदान में 38891 प्रत्याशी हैं। गौरतलब है कि बीजेपी और कांग्रेस के 10245 वार्डों में से ढाई हजार वार्डों में प्रत्याशी नहीं है। इसमें बीजेपी के करीब एक हजार वार्ड है। कोटपूतली व भरतपुर निगम प्रदेश के सबसे बड़े ‘हॉट-स्पॉट’ कोटपूतली नगर परिषद और संभाग मुख्यालय का भरतपुर नगर निगम पूरे प्रदेश में सबसे बड़े चुनावी रणक्षेत्र बनकर उभरे हैं। यहां नाम वापसी के बावजूद निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों की भारी तादाद ने दोनों प्रमुख दलों (भाजपा और कांग्रेस) के पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह उलझा दिया है। कोटपूतली में साख की लड़ाई, हर सीट पर 7 से ज्यादा दावेदार हैं। भरतपुर, जोधपुर-बीकानेर में भी दिलचस्प समीकरण सबसे कम प्रत्याशी वाले क्षेत्र : इसके विपरीत, बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगर पालिका पूरे प्रदेश में सबसे शांत क्षेत्र है, जहां 20 वार्डों के लिए केवल 41 प्रत्याशी (औसत 2.05) मैदान में हैं। इसी तरह बालोतरा की ही गुढ़ामलानी नगर पालिका में 20 वार्डों पर महज 44 प्रत्याशी बचे हैं। इन क्षेत्रों में सीधा मुकाबला (आमने-सामने की टक्कर) होने के कारण मतों का बिखराव नहीं होगा।