नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर 10 से कांग्रेस प्रत्याशी सुंदर माली के नामांकन खारिज होने के मामले में नया मोड़ आया है। सुंदर माली ने निर्वाचन अधिकारी (आरओ) के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। हालांकि, उन्हें फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने मामले में तुरंत राहत नहीं दी और सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की है। नामांकन रद्द होने के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने स्थानीय प्रशासन और भाजपा पर आरोप लगाए हैं। पूर्व विधायक और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आरओ और नगर परिषद आयुक्त राजनीतिक दबाव में भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद साजिश के तहत सुंदर माली को अतिक्रमण और डेयरी बूथ के महज 6000 रुपए के बकाए का फर्जी नोटिस दिया गया। जबकि, नगर परिषद खुद पहले ही 'नो ड्यूज' (NOC) जारी कर चुकी थी। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि भाजपा प्रत्याशियों पर ठेकेदारी और आपराधिक मामले होने के पक्के सबूत देने के बावजूद उनके फॉर्म खारिज नहीं किए गए। कांग्रेस ने इसे प्रशासन की तानाशाही और अपनी प्रत्याशी के साथ अन्याय बताया है।