राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर की मांगों के समर्थन में जिला अधिवक्ता संघ नागौर का न्यायिक कार्यों से बहिष्कार बुधवार को भी जारी रहा। अधिवक्ताओं के पैरवी से दूर रहने के कारण नागौर के विभिन्न न्यायालयों में नियमित कामकाज प्रभावित हुआ। अधिकांश मामलों में सुनवाई आगे की तारीखों के लिए स्थगित हुई। अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति और पक्षकारों की कम आवाजाही के चलते दोपहर तक न्यायालय परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में सन्नाटा नजर आया। खाली समय में अधिवक्ता परिसर में बैठकर आंदोलन और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते दिखाई दिए। जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष डॉ. पवन श्रीमाली ने बताया कि जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में बुधवार को बड़ी संख्या में प्रकरण सूचीबद्ध थे। कार्य बहिष्कार के चलते इन न्यायालयों में अधिवक्ताओं की नियमित पैरवी नहीं हुई। किशोर न्याय बोर्ड सहित अन्य न्यायालयों में भी न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ और कई पेशियां आगे बढ़ीं। राजस्व न्यायालयों में भी कामकाज प्रभावित अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने का असर राजस्व न्यायालयों पर भी रहा। एसडीएम, एसीएम और राजस्व अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अधिवक्ता न्यायिक कार्य के लिए उपस्थित नहीं हुए। जिला कलेक्टर और अतिरिक्त जिला कलेक्टर के न्यायालयों में भी नियमित सुनवाई प्रभावित रही। जायल और खींवसर बार का भी समर्थन आंदोलन को जिले की अन्य बार एसोसिएशनों का भी समर्थन मिला। जायल बार अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र सिंह कालवी और खींवसर बार सचिव किशन देवड़ा के नेतृत्व में वहां के अधिवक्ता भी न्यायिक कार्यों से विरत रहे। 6 सितंबर तक जारी रहेगा कार्य बहिष्कार डॉ. श्रीमाली ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरोध का विषय नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और सिद्धांतों से जुड़ा राज्यव्यापी मुद्दा है। हाईकोर्ट की दोनों बार एसोसिएशनों की मांगों के समर्थन में जिला अधिवक्ता संघ नागौर की ओर से 6 सितंबर तक न्यायिक कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया गया है।