नगर निकाय चुनाव में टिकट बंटने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में नाराजगी सामने आने लगी है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दावेदारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं कुछ दावेदारों ने दूसरी पार्टी में शामिल हुए बिना ही विरोधी प्रत्याशी को समर्थन दे दिया है। इससे उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नागौर के कई वार्डों में टिकट बंटने के बाद चुनाव का समीकरण बदल गया है। खासतौर पर वार्ड नंबर 10 में कांग्रेस के टिकट बंटने के बाद पारिवारिक और राजनीतिक टकराव चर्चा में है। यहां कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदार ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने कांग्रेस जिलाध्यक्ष को खुली चुनौती भी दी है। टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव मैदान में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में कई दावेदार टिकट मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे। पार्टी ने इनमें से कई लोगों को प्रत्याशी नहीं बनाया। इसके बाद कुछ दावेदारों ने निर्दलीय नामांकन भरकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। अब ये उम्मीदवार अपनी ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव लड़ेंगे। इससे भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने वोट बंटने की चुनौती खड़ी हो सकती है। कई वार्डों में ऐसे बागी उम्मीदवार पार्टी के पुराने वोटरों में भी सेंध लगा सकते हैं। इससे दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के लिए मुकाबला मुश्किल हो सकता है। आज शाम 4 बजे के बाद तस्वीर साफ होगी नगर निकाय चुनाव में नाम वापस लेने का आज आखिरी दिन है। प्रत्याशी दोपहर बाद 3 बजे तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। 4 बजे के बाद यह साफ हो जाएगा कि भाजपा और कांग्रेस के कितने बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहेंगे और कितने उम्मीदवार नाम वापस लेकर अपनी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। इसके बाद ही नागौर के 60 वार्डों में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की असली स्थिति साफ होगी और मुकाबले का गणित सामने आएगा।