जयपुर नगर निगम चुनावों को लेकर झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। नए परिसीमन और टिकट वितरण के बाद बदले समीकरणों ने भाजपा और कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र मे नगर निगम के वार्ड नंबर 23 से 37 तक के कुल 15 वार्ड आते हैं। यहां बागियों को लेकर अधिक समस्या नहीं है। 3 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला होगा। अन्य वार्डों में कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला है। विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है। ड्रेनेज सिस्टम, जलभराव, क्षतिग्रस्त सड़कें, भूमिगत हाईटेंशन लाइन, रोडलाइड, सफाई सहित कई मुद्दे हावी है। बारिश में मुख्य सड़कों और कॉलोनियों में जलभराव और सीवरेज लाइन चौक होना सबसे बड़ी समस्या है। कई कॉलोनियां अभी तक बीसलपुर परियोजना से नहीं जुड़ पाई हैं। लोग पेयजल के लिए टैंकरों पर निर्भर है। खातीपुरा, निवारू रोड, कालवाड़ रोड, सिरसी रोड, बजरी मंडी रोड सहित कई कॉलोनियों की सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। स्थानीय लोगों को शहर में आने के लिए रोजाना जाम का सामना करना पड़ता है। हूपर्स की अनियमितता के कारण खाली पड़े भूखंड अवैध कचरा डिपो बन गए। पिछले ग्रेटर नगर निगम में 2 पार्षद चेयरमैन बनने में कामयाब रहे थे। बदहाल सड़कों से आमजन बेहाल, जिम्मेदार बेपरवाह... इन 3 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला; यहां वार्ड 25 में निर्दलीय कौशल्या चौधरी, वार्ड 27 में आरएलपी से सुरेश चौपड़ा त्रिकोणीय और वार्ड 29 से चतुष्कोणीय मु​काबला है। भाजपा ने महादेव शर्मा को वार्ड 29 से टिकट देकर पैराशूट प्रत्याशी उतारा है। इससे नाराज होकर विक्रम सिंह ने निर्दलीय ताल ठोक दी। भाजपा झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से टिकट मांगने वाले दावेदारों की लंबी लिस्ट थी। हालांकि यहां पर स्थानीय विधायक राज्यवर्धन सिंह राठौड़ अपनी पसंद के लोगों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। कई वार्डों में टिकट नहीं मिलने से कार्यकर्ता निर्दलीय मैदान में हैं। इससे इन वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला बन गया और पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए लालचंद कटारिया ने भी अपने लोगों को कुछ टिकट दिलाए। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गढ़ को बचाने की है। कांग्रेस कांग्रेस में कद्दावर नेता माने जाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालचंद कटारिया भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसलिए विधानसभा चुनाव में यहां प्रत्याशी रहे अभिषेक चौधरी ने टिकट वितरण में अहम रोल निभाया। वे अपने प्रत्याशियों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। कांग्रेस में टिकट को लेकर अधिक मारामारी भी नहीं थी। इस सीट पर निगम चुनाव में कांग्रेस हमेशा भाजपा से पीछे रही है। इस बार देखना होगा कि कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन भाजपा को मात दे पाता है या नहीं।