राजस्थान में बॉस के नाम से कर्मचारियों को लूटने वाले दो और आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने अपने खाते ठगों को दिए थे। एक आरोपी की फर्म के खाते मे 2 करोड़ रुपए आए थे। पुलिस इस मामले में अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी कुल 6.80 करोड़ की ठगी कर चुके हैं। गिरोह के सदस्य ​म्यूल बैंक अकाउंट, क्रिप्टो करेंसी, टेलीग्राम और लेयरिंग के जरिए साइबर ठगी की रकम मास्टरमाइंड तक पहुंचाते थे। पुलिस की टीमें अन्य राज्यों में भी साइबर क्रिमिनर्ल्स की तलाश में दबिश दे रही हैं। एडीजी (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया- 6.80 करोड़ के 'बॉस स्कैम' में आरोपी संदीप कुमार निवासी भटिंडा पंजाब और बरैया राम निवासी भावनगर गुजरात को अरेस्ट किया गया है। पंजाब की एक फर्म का आरोपी संदीप कुमार डायरेक्टर है, जबकि आरोपी बरैया राम बैंक अकाउंट होल्डर है। 2 सितंबर को 6.80 करोड़ का बॉस स्कैम मामला सामने आया था। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 2 करोड़ रुपयए आरोपी संदीप कुमार की फर्म के बैंक अकाउंट में जमा हुए थे। जांच में सामने आया कि आरोपी संदीप कुमार ने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए से अपना बैंक अकाउंट किराए पर देने के लिए कॉन्टैक्ट किया था। कमीशन के लालच में उसने घटना से करीब 15 दिन पहले कॉरपोरेट बैंक अकाउंट खुलवाया, इसमें 2 करोड़ रुपए जमा हुए। साइबर क्रिमिनर्ल्स को आरोपी संदीप ने अपने बैंक अकाउंट की चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अकांउट से जुड़ी सिम उपलब्ध करा दी। रींगस के होटल में संदीप को ठहराकर बैंक अकाउंट में होने वाले लेन-देन को साइबर क्रिमिनर्ल्स ने संचालित किया। अकाउंट में होने वाले लेन-देन और कमीशन की जानकारी आरोपी संदीप को टेलीग्राम क जरिए से दी जाती रही। दूसरे आरोपी बरैया राम ने 10 से 15 हजार रुपए के कमीशन के लालच में अपना बैंक अकाउंट, चेक, एटीएम कार्ड और पासबुक उपलब्ध कराए। उसके बैंक अकाउंट में आए साइबर ठगी की रकम में से 3.94 लाख रुपए चेक के माध्यम से निकाले गए। इसके अलावा खाते से अन्य लेन-देन भी किए गए। वॉट्सऐप पर निदेशक बनकर अकाउंट्स हेड को दिया झांसा इस मामले में साइबर किमिल्नर्स ने कंपनी के निदेशक के नाम और फोटो का यूज किया। कंपनी के अकाउंट्स हेड को वॉट्सऐप के जरिए पेमेंट के डायरेक्शन दिए गए थे। साइबर क्रिमिनर्ल्स ने परिवादी के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बनाकर वाट्सऐप वेब में मौजूद निदेशक के नंबर को ब्लॉक कर उसकी जगह पर अपने मोबाइल नंबर को उसी नाम और प्रोफाइल फोटो के साथ सेव कर दिया था। पूर्व में हुई बातचीत की नकल तैयार कर अकाउंट्स हेड को विश्वास में लिया गया। उसके बाद कंपनी के बैंक अकाउंट्स से 6.80 करोड़ रुपए तीन बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए गए। यह पेमेंट कंपनी के किसी भी निदेशक की ओर से अधिकृत नहीं था। कई अकाउंट्स में घुमाकर क्रिप्टो करेंसी में बदला जांच में सामने आया कि गिरोह साइबर ठगी की रकम को छिपाकर आगे पहुंचाने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी का यूज करता है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए बैंक अकाउंट, एटीएम, सिम और पासबुक की किट उपलब्ध कराई जाती थी। ठगी की रकम अकाउंट्स में आने के बाद उसे एटीएम या चेक से कैश निकाल लिया जाता था। नहीं तो यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और दूसरे बैंक अकाउंट में तुरंत ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद कई बैंक अकाउंट के जरिए रकम को घुमाकर यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी में बदल आगे भेज दिया जाता था। कड़ी से कड़ी जोड़ रहे पुलिस की ओर से वॉट्सऐप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन की रकम की कड़ी का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। अब तक की जांच में ठगी की रकम प्रथम लाभार्थी अकांउट्स से आगे कई खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है। अन्य आरोपियों और ठगी की रकम से जुड़े खातों की तलाश जारी है। ये भी पढ़ें… कंपनी-डायरेक्टर के वॉट्सएप नंबर बदल कर्मचारी से 7 करोड़ ठगे:सिंगापुर-हांगकांग से मास्टरमाइंड ने 250 खातों में भेजे रुपए; 4 साइबर ठग गिरफ्तार जयपुर में साइबर ठगों ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर कंपनी के अकाउंटेंट से 6 करोड़ 80 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने कंपनी के अकाउंटेंट के कंप्यूटर में मौजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर वॉट्सएप वेब तक पहुंच बनाई। इसके बाद कंपनी निदेशक का नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर बदमाशों ने अपने नंबर डाल दिए। इसके बाद अकाउंटेंट को फर्जी मैसेज भेजे थे। (पूरी खबर पढ़ें)