प्रदेश में मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने और ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’ अभियान को मजबूत करने के लिए पहली बार 220 नए खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) लगाए गए हैं। लेकिन सिस्टम की सुस्ती से इन अधिकारियों के हाथ बंधे हैं और मिलावटखोर बैखोफ हैं। नए एफएसओ 20 दिन से ब्रास सील (पीतल की मुहर) का इंतजार कर रहे हैं। इनको पहले पोस्टिंग के लिए इंतजार करना पड़ा। पोस्टिंग मिली तो वेतन में देरी हुई और अब फील्ड में पहुंचने के बाद कार्रवाई के लिए जरूरी ब्रास सील ही नहीं मिली है। बिना अधिकृत सील के खाद्य नमूने लेने और उन्हें सील करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार ने मिलावट के खिलाफ अभियान में करोड़ों रुपए और बड़ा प्रशासनिक तंत्र लगा रखा है। ऐसे में सवाल है कि नए 220 एफएसओ के लिए आवश्यक और अधिकृत ब्रास सील उपलब्ध कराने में 20 दिन क्यों लग गए। प्रदेश में 30 जून तक सेन्ट्रल लाइसेंस 3444, स्टेट लाइसेंस 61, 357 और रजिस्ट्रेशन 583285 है। पदस्थापित 220 एफएसओ के लिए ब्रास सील बनवाने का काम प्रक्रियाधीन है। जल्द ही मिलेगी। -अविचल चतुर्वेदी, आयुक्त, फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल भास्कर एक्सपर्ट - कपिल शर्मा, एडवोकेट खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को दुकान, निर्माण यूनिट, होटल या रेस्टोरेंट से नमूने लेने के बाद उन्हें सील करने के लिए ब्रास सील दी जाती है। नमूना लेने के बाद पैकेट या बोतल को कपड़े में बांधकर आवंटित ब्रास सील से लॉक किया जाता है, ताकि उसमें छेड़छाड़ न हो सके। अधिकृत ब्रास सील नहीं होने या किसी दूसरी सील के इस्तेमाल की स्थिति में कोर्ट में सैंपल की प्रमाणिकता को चुनौती दी जा सकती है। इससे केस कमजोर हो सकता है।