दिसंबर तक सभी चयनित स्कूलों में लैब स्थापित करने का लक्ष्य, 5.49 करोड़ रुपए खर्च करेगा कृषि विभाग अब खेत की मिट्टी और पानी की सेहत जांचने के लिए किसानों को जिला मुख्यालय तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। गांव के नजदीक ही पीएमश्री स्कूलों में मिट्टी-पानी की जांच होगी और किसानों को उनकी जमीन की सेहत का पूरा रिपोर्ट कार्ड मिलेगा। कृषि विभाग प्रदेश के 549 पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अत्याधुनिक मिट्टी-पानी जांच लैब स्थापित करने जा रहा है। ये व्यवस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ कार्यक्रम के तहत शुरू की जा रही है। खास बात ये है कि इन लैब में सिर्फ जांच ही नहीं होगी, बल्कि स्कूली छात्र भी किसानों के खेतों से सैंपल लेकर जांच की प्रक्रिया सीखेंगे। इन प्रयोगशालाओं में स्कूल शिक्षक और कृषि विभाग के वैज्ञानिक मिलकर पहले छात्रों को मिट्टी-पानी जांच का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद कक्षा 7, 8, 9 और 11वीं के छात्र किसानों के खेतों से मिट्टी व पानी के सैंपल लेकर स्कूल की लैब में जांच करेंगे। जांच के आधार पर किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे। पहले चरण में राज्य के 549 पीएमश्री स्कूलों का चयन किया गया है। इस साल दिसंबर तक सभी चयनित स्कूलों में लैब स्थापित करने का लक्ष्य है। मोबाइल एप से होगा रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन होगी रिपोर्ट : पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कृषि विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेगा। विभाग की ओर से इसी सप्ताह चयनित स्कूलों के नाम फाइनल किए जाएंगे। इसके बाद दिसंबर तक लैब में उपकरण स्थापित कर जांच सुविधा शुरू करवा दी जाएगी। सभी 549 पीएमश्री स्कूलों को सबसे पहले कृषि विभाग के ‘सॉइल हेल्थ कार्ड पोर्टल’ पर पंजीकृत किया जाएगा। किसानों को समय पर मिट्टी-पानी जांच की सुविधा उपलब्ध करवाने और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले किसान परिवारों के बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ मिट्टी-पानी जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के मकसद से राज्य सरकार ने यह स्कीम लॉन्च की है। जल्द ही पीएमश्री स्कूलों में ये सुविधा शुरू कर दी जाएगी।- शिवजीराम कटारिया, संयुक्त निदेशक कृषि, सीकर