सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने अरावली की परिभाषा और उसके संरक्षण के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी से कहा- लगता है कि आप मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं। सीजेआई की अगुवाई में तीन न्यायाधीशों की बेंच सोमवार को इस मामले में सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 27 फरवरी 2027 तक का समय मांगा था। इस पर सीजेआई ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- कमेटी की मांग से ऐसा प्रतीत होता है कि वह मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं। कमेटी ने मेरे रिटायरमेंट के बाद की तारीख मांगी है। अगर कमेटी सक्षम नहीं है तो हम नए सिरे से कमेटी का गठन कर सकते हैं। बेंच ने कमेटी के 6 महीने के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए उन्हें 2 महीने यानी 30 नवंबर तक रिपोर्ट सब्मिट करने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने के लिए कमेटी को दिन-रात काम करने का निर्देश दिया। राजस्थान-गुजरात के आदिवासी समुदाय से भी बात करें सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह अपने अंतिम निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाएं। जिसमें वह अरावली भूभाग से संबंधित निर्णयों से प्रभावित होने वाले सभी हितधारकों, जिसमें राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदाय भी शामिल है, उनकी बात सुने। अदालत ने कमेटी को अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अनुमति भी दी। जिससे कोर्ट को प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं करना पड़े। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 2 दिसंबर को सुनवाई करेगा।