1. कुपोषण कम करना: बच्चों में बौनेपन, कम वजन, और एनीमिया (खून की कमी) की समस्या को रोकना। 2. सही आहार: गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सही पोषण और पूरक आहार के बारे में जानकारी देना। 3. स्वास्थ्य और शिक्षा: आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण भी, पढ़ाई भी, स्वास्थ्य जांच जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना। 4. जन-आंदोलन: हर व्यक्ति को जोड़कर इसे एक जन-आंदोलन बनाना। ताकि स्थानीय और पौष्टिक भोजन का उपयोग बढ़े। भास्कर संवाददाता | झुंझुनूं बच्चों और महिलाओं में कुपोषण को दूर करने के लिए अब उनके अभिभावकों को भी आहार और प्रोटीन संबंधी रेसिपी सिखाई जाएंगी। इसके अलावा बच्चों और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाएगी। अन्य कई गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। महिला व बाल विकास विभाग के उप निदेशक बिजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इसके लिए महिला व बाल विकास विभाग की ओर से एक महीने का शेड्यूल तय किया गया है। यह अभियान 9 सितंबर से शुरू होगा। इस अभियान को राष्ट्रीय पोषण माह का नाम दिया गया है। इसके तहत 9 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाकर आंगनबाड़ी केंद्रों पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस प्रकार के निर्देश समेकित बाल विकास सेवाओं के निदेशक वासुदेव मालावत ने विभाग के उपनिदेशकों को जारी किए। इसी अभियान में बच्चों के अभिभावकों को संतुलित आहार व रेसिपी बताई जाएंगी। विभाग की ओर से जिले में 1630 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। सभी पर इस विशेष अभियान की शुरुआत होगी। इसका फायदा केंद्र से जुड़े बच्चों, उनके अभिभावकों, गर्भवती महिलाओं, किशोरियों को होगा।