भास्कर न्यूज | राजसमंद नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष को थामने के लिए राजनीतिक दल अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। कई वार्डों में टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों के निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी के बीच संगठन उन्हें मनाने में जुटे हैं। चर्चा है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को बोर्ड गठन के बाद मनोनीत पार्षद बनाने में प्राथमिकता देने का भरोसा दिया जा रहा है। वरिष्ठ पदाधिकारी और रणनीतिकार नाराज दावेदारों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें चुनाव मैदान से हटने और अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में काम करने के लिए राजी कर रहे हैं। निर्दलीय उतरा तो अपने ही वोट बैंक में सेंध: निकाय चुनाव में जीत-हार का अंतर कई बार बेहद कम रहता है। ऐसे में पार्टी का मजबूत दावेदार निर्दलीय उतरता है तो अधिकृत प्रत्याशी के सामने सीधी चुनौती खड़ी हो सकती है। समर्थकों के वोट बंटने से चुनावी गणित बिगड़ने और मुकाबला त्रिकोणीय होने की आशंका है। यही कारण है कि मजबूत जनाधार वाले नाराज दावेदारों को संगठन प्राथमिकता से साध रहा है। सोशल मीडिया पर छलका टिकट कटने का दर्द: टिकट नहीं मिलने के बाद कुछ दावेदारों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की है। एक दावेदार ने भावुक पोस्ट में लिखा कि पार्टी ने टिकट भले छीन लिया हो, लेकिन वार्डवासियों ने उसका ‘असली टिकट’ दिल में लिखा है। पोस्ट में पांच साल की सेवा और जनसंपर्क का हवाला देते हुए समर्थन की अपील की गई। मनोनीत पार्षद यानी एल्डरमैन का पद टिकट से वंचित कार्यकर्ताओं को साथ रखने के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि नियुक्ति सरकार और निकाय के नियमों के तहत होती है। इसलिए चुनाव के समय दिया गया ऐसा आश्वासन नियुक्ति की गारंटी नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह फॉर्मूला नाराजगी शांत करने की कोशिश के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है।