बूंदी जिले की नगर परिषद बूंदी और तीन नगर पालिकाओं में 9 सितंबर को पहले चरण का मतदान होगा। बाकी निकायों में 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। इन चुनावों में कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। राजस्थान की सबसे छोटी नगर पालिका इंदरगढ़ में भी बुधवार को मतदान होगा। बूंदी नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने जिन उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं, उनकी साख दांव पर है। कांग्रेस में विधायक हरिमोहन शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। पार्टी के अंदर ही भीतरघात की आशंका जताई जा रही है। वहीं, भाजपा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की टीम के मैनेजमेंट और उनके विकास कार्यों के नाम पर चुनाव लड़ रही है। बूंदी में निर्दलीय उम्मीदवार किंग मेकर की भूमिका निभा सकते हैं। वैसे तो यहां भाजपा का दबदबा माना जा रहा है, लेकिन कई वार्डों में मजबूत दावेदारों को टिकट नहीं मिला है। इससे नाराज होकर कई बागी निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर गए हैं। ये निर्दलीय बोर्ड बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दोनों ही पार्टियों में आखिरी समय पर टिकट बंटवारे से मौजूदा जनप्रतिनिधि नाराज बताए जा रहे हैं। इससे भीतरघात की पूरी आशंका बनी हुई है। देई नगरपालिका में दो पूर्व मंत्रियों की साख दांव पर है। इनमें पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी और पूर्व खेल मंत्री अशोक चांदना शामिल हैं। दोनों नेताओं ने देई में सभाएं की हैं। यहां अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। कापरेन और केशोरायपाटन में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां भाजपा की पूर्व विधायक चंद्रकांता मेघवाल और कांग्रेस विधायक सीएल प्रेमी की प्रतिष्ठा दांव पर है। दोनों नेता लगातार घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं। यह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का क्षेत्र है, इसलिए उनके कैंप कार्यालय से भी लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। राजस्थान की सबसे छोटी नगर पालिका स्थिति आजादी से पहले रियासतकाल में नगर पालिका बनी इंद्रगढ़ को भले ही 100 साल हो गए, लेकिन आज भी हालत ज्यादा सुधरे हुए नहीं हैं. यहां तक कि वोटर संख्या भी महज 4856 है। नगर पालिका में 20 वार्ड हैं। इनमें 145 से लेकर 450 तक वोटर हैं। इक्के दुक्के वार्ड में ही 300 से ज्यादा मतदाता हैं। पूरे पालिका क्षेत्र में 90 से 95 फीसदी वोटिंग रहती है। ऐसे में 70 से 100 वोट लाने वाला भी पार्षद बन जाता है। ऐसा लंबे समय से चल रहा है।