उदयपुर में नाबालिग से रेप और गर्भधारण के बाद उसकी मौत के मामले में पुलिस द्वारा जांच में बरती गई गंभीर लापरवाही के कारण दो आरोपी कोर्ट से बरी हो गए। उदयपुर की पोक्सो-1 कोर्ट ने इस मामले में कहा- थानाधिकारी रामरूप मीणा और एसआई मुगलाराम ने जांच में अनियमितता बरती। इन्होंने सही ढंग से अपना कर्तव्य पूरा नहीं किया। अभियुक्तों के खिलाफ सबूत एकत्र नहीं कर पाना पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा पर संदेह खड़ा करता है। कोर्ट ने इस संबंध में पुलिस डीजी और उदयपुर आईजी को भी लिखा है कि लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसकी रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराया जाए। ये था पूरा मामला यह घटना 29 अप्रैल 2025 की है। नाबालिग के पिता ने जिले के एक ग्रामीण थाने में रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि उसी इलाके के एक युवक ने मेरी बेटी के साथ रेप किया। इससे वह गर्भवती हो गई थी। फिर उसे गर्भपात के लिए क्लिनिक संचालक के पास ले जाया गया। इसने उसे दवाई दी और ऑपरेशन किया। इससे उसकी तबीयत बिगड़ी और उसने गुजरात के एक हॉस्पिटल में 18 मई 2025 को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। जांच में सामने आया कि क्लिनिक संचालक के पास कोई डॉक्टर की डिग्री ही नहीं थी। वह बिना ​डिग्री के इलाज कर रहा था। घटना की जांच करते हुए पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया। विशिष्ट लोक अभियोजक पूनमचंद मीणा ने 14 गवाह और 26 दस्तावेज पेश किए, लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हो पाए। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने दोनों ही आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।