उज्जैन में सड़क के बीच हनुमान प्रतिमा को प्रशासन 6 दिन से हिला नहीं पाया है। प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के लिए सती गेट के पास स्थित हनुमान मूर्ति को हटाने की कोशिश 4 सितंबर को शुरू की, लेकिन नाकाम रहा। प्रशासन की ओर से करीब एक हफ्ते में मंदिर के आसपास का ज्यादातर हिस्सा तोड़ा जा चुका है, जबकि हनुमान मूर्ति फिलहाल टेंट में है। अब प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा हटाने की कोशिश की ही नहीं गई। खड़े हनुमान की मूर्ति सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। मूर्ति के वीडियो और रील्स वायरल हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। उमा ने लिखा- प्लान बदलकर रोड बनाएं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मामले में सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें कहा है- भोपाल में कमलापति रोड को चौड़ा करते वक्त मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचा था। यही समाधान उज्जैयिनी के खड़े हनुमान मंदिर का हो सकता है। साध्वी हर्षानंद ने सरकार को 2 दिन का अल्टीमेटम दिया साध्वी हर्षानंद गिरि (हर्षा रिछारिया) गुरुवार को खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। उन्होंने पूजा की और प्रतिमा हटाने के प्रयासों का विरोध किया। उन्होंने प्रशासन से मंदिर पहुंचकर माफी मांगने, पूजा करने और मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लेने को कहा। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने अनशन और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी। उन्होंने सरकार को 2 दिन का अल्टीमेटम दिया। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि उन्हें इतनी हिम्मत मिले कि वे बाबा के लिए आवाज उठा सकें। IIT इंदौर की टीम फिर करेगी जांच प्रतिमा को हटाने के प्रयासों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच IIT इंदौर की टीम सोमवार को मंदिर पहुंची थी। टीम ने मंदिर में जांच की थी। अब टीम गुरुवार को एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करने पहुंची है। रील्स देखकर कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु प्रतिमा हटाने के प्रयासों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गुरुवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। दिल्ली, नागपुर, राजस्थान समेत कई राज्यों से उज्जैन पहुंचे श्रद्धालु महाकाल दर्शन के साथ खड़े हनुमान के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में संत-महंत भी मंदिर पहुंचे और पूजा की। दिल्ली निवासी श्रद्धालु अंजलि ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिमा हटाने के प्रयासों के वीडियो देखे थे। इसके बाद वह खड़े हनुमान के दर्शन करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वह श्रद्धालु के रूप में बाबा के दर्शन और माथा टेकने आई हैं। नासिक से आए अनिल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमान की रील देखी थी। इसके बाद वे दर्शन करने आए हैं और यहां से रील बनाकर ले जाएंगे। नागपुर से आए महेश टिचकुले ने कहा कि वे दो दिन से सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आने का फैसला किया। राजस्थान के अजमेर से आए सुशील खंडेलवाल ने बताया कि वे महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। घर पर रील देखते समय खड़े हनुमान मंदिर के बारे में पता चला तो यहां दर्शन करने पहुंच गए। संत बोले- विकास करें, बाबा को नहीं हटाएं महामुक्तेश्वरी धाम के पीठाधीश्वर पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी ने भी प्रतिमा हटाने का विरोध किया। उन्होंने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की अपील की। उनका कहना था कि नीलगंगा क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान भी धार्मिक संरचनाओं के आसपास से रास्ता निकाला गया है। यहां भी ऐसा समाधान निकाला जा सकता है। मुख्य पुजारी बोले- अब फैसला प्रशासन करे मुख्य पुजारी महेश बैरागी ने बताया कि शुरुआत में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने पर सशर्त सहमति दी गई थी। बाद में नगर निगम की टीम ने प्रतिमा के आसपास का मलबा और प्लास्टर हटाया, लेकिन संरचना को नुकसान की आशंका के चलते कार्रवाई रोक दी गई। इसके बाद इंदौर से विशेषज्ञ बुलाए गए। प्रतिमा के आसपास और पीछे खुदाई कर उसकी स्थिति समझने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों ने आधुनिक उपकरणों और स्कैनिंग तकनीक से जांच की जरूरत बताई थी। पुजारी के अनुसार, विशेषज्ञों के दोबारा आने का अभी इंतजार है। प्रशासन बोला- प्रतिमा हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी किया। कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है। श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रेस नोट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए जा चुके हैं। प्रशासन के मुताबिक अभी तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने संबंधी कोई प्रयास मशीन अथवा मानवीय तरीके से नहीं किया गया है। भक्त बोले- हमारे पास वीडियो एविडेंस प्रशासन के प्रेस नोट के बाद कुछ भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास से जुड़े वीडियो उनके पास मौजूद हैं और अधिकारी चाहें तो वे उन्हें दिखाने के लिए तैयार हैं। मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि प्रशासन को जनभावना का आदर करते हुए हनुमानजी को यहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन कह रहा है कि प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया, तो वे इसके सबूत दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी आई थी। रात में कटर मशीन भी लाई गई थी। उनके मुताबिक इन सभी घटनाओं के वीडियो उनके पास मौजूद हैं। संत और कांग्रेस विधायक भी पहुंचे, हनुमान चालीसा पढ़ी सोशल मीडिया पर खड़े हनुमान की रील वायरल होने और मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ने के बाद बुधवार को कई संत भी मंदिर पहुंचे। कांग्रेस विधायक महेश परमार और विधायक दिनेश जैन बोस समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी यहां पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रतिमा को लेकर चल रही कार्रवाई का विरोध किया। प्रतिमा हटी तो दक्षिण से उत्तर मुखी हो जाएंगे हनुमान वर्तमान में खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर है। प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो स्थान तय किया है, वहां प्रतिमा स्थापित होने पर उनका मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा। श्रद्धालुओं का कहना है कि दिशा में यह बदलाव मंदिर की धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को प्रभावित कर सकता है। प्रतिमा को तीन बार स्थानांतरित करने की कोशिश विफल होने के बाद अब भक्त इसे भगवान की इच्छा मान रहे हैं और मंदिर हटाने की कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे हैं।
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उज्जैन में सड़क चौड़ी करने के लिए खड़े हनुमान मंदिर का ढांचा तोड़ दिया गया। जेसीबी और क्रेन से प्रतिमा हटाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से हिली तक नहीं। पढ़ें पूरी खबर...