भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली विद्याधर नगर विधानसभा सीट नगर निगम के चुनाव में खासी चर्चित है। टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष से यहां बागियों ने भाजपा का गणित बिगाड़ दिया है। यहां मुद्दों से ज्यादा इस बात की चर्चा है कि भाजपा अपना गढ़ बचाने में कामयाब रह पाती है या नहीं। यहां सबसे ज्यादा 22 वार्ड हैं, जिस पार्टी के अधिक पार्षद जीतेंगे, उस पार्टी का महापौर बनने की संभावना अधिक रहेगी। हालांकि 2008 में अस्तित्व में आई इस सीट से अब तक कोई महापौर नहीं बना है। पिछले बोर्ड में 3 चेयरमैन जरूर यहां से बने थे। अगर हम इस सीट का इतिहास देखें तो भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा के साथ निगम चुनाव में भी पिछली बार 42 में से 27 सीट जीती थीं। इस बार वार्डों की संख्या 22 है। सीटें कम होने से टिकट कट गए, 8 वार्डों में फंसी भाजपा भाजपा ने 2014 के चुनाव में 72% और 2020 में 65% सीटें जीती थीं। भाजपा की विधायक दिया कुमारी अपने अधिकांश नामों को टिकट दिलवाने में कामयाब रही हैं। कुछ वार्डों में आरएसएस और संगठन स्तर पर भी टिकट दिए गए हैं, लेकिन वार्ड कम होकर 22 होने से दावेदारों की लंबी लिस्ट थी। कई वर्तमान पार्षदों का भी टिकट कट गया। इससे अंदरखाने असंतोष दिख रहा है। 8 में बागियों ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे, जिनके आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा कांग्रेस; टिकट के दावेदार कम होने से सिर्फ एक वार्ड में ही बागी यहां से कांग्रेस को राहत है। भाजपा का गढ़ होने और पिछली बार 42 में से सिर्फ 12 ही पार्षद होने से टिकट कटने का ज्यादा असर नहीं हुआ। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा ने यहां अपनी पसंद से टिकट बांटे हैं। सिर्फ एक वार्ड-19 में ही कांग्रेस को बागी मिला है। ऐसे में भाजपा के 8 बागियों का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।