करौली जिले के करणपुर स्थित प्राचीन बीजासन माता मंदिर में 'छठ' के अवसर पर मेले का आयोजन शुरू हो गया है। लगभग 350 साल पुराने इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर मंदिर के गर्भगृह के पट 24 घंटे खुले रहेंगे, जिससे भक्तों में विशेष उत्साह है। करणपुर गांव की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर जिला मुख्यालय करौली से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। 'छठ' के वार्षिक मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। मंदिर में 200 सालों से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित मंदिर का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है। वर्ष 1713 में करौली रियासत काल के दौरान भक्त बलवीदा गौड़ सवाई माधोपुर के इंद्रगढ़ से माता की ज्योति को विधि-विधान के साथ यहां लाए थे। तभी से यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वर्तमान में पुजारी परिवार की 8वीं पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन कर रही है। मंदिर में लगभग 200 वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित है, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है। एक और अनूठी परंपरा यह है कि मंदिर के गर्भगृह के पट साल में केवल 'छठ' के दिन ही पूरे 24 घंटे के लिए खुले रहते हैं। इसके अलावा मंदिर के लंबे इतिहास में माता का विशेष श्रृंगार (अंगराग) केवल एक बार ही किया गया है। मेले में भीड़ को लेकर व्यापक इंतजाम मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और ग्राम पंचायत ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। करणपुर बस स्टैंड के पास वाहनों के लिए निशुल्क पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात है और पूरे क्षेत्र में निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही, 24 घंटे बिजली और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाओं, अटल सेवा केंद्र और तहसील परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। भक्ति में डूबी रहेगी छठ की रात छठ की रात मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति में डूब जाता है। माता के जयकारों के साथ जागरण होता है, जहां लांगुरिया गीत, ढोल-थाली की ध्वनि और भजन-कीर्तन से वातावरण गूंज उठता है। श्रद्धालु रातभर माता की आराधना कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। यह मेला न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि परंपरा, संस्कृति और लोकभक्ति का जीवंत संगम भी बन चुका है।