सिर्फ 900 दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण, बाकी पर मनमानी दवाओं की भारी मार्जिन के खेल में मरीज पिस रहे हैं। मरीजों को बड़ी राहत तभी मिल सकती है, जब राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) दवाओं और इलाज के उपयोग में आने वाली अन्य सामानों की एमआरपी पर प्रभावी नियंत्रण करे। कैंसर, गैस्ट्रो, कार्डियो और न्यूरो सहित अधिकांश बीमारियों की दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होने से अस्पताल 500 से 3000% तक मार्जिन वसूल रही हैं। भास्कर पड़ताल में कई कारण सामने आए हैं, जिनकी वजह से मरीजों को दवाएं और चिकित्सा सामग्री कई गुना अधिक कीमत पर मिल रही हैं। सबसे बड़ा कारण एनपीपीए द्वारा अधिकांश दवाओं और चिकित्सा सामग्री की एमआरपी पर नियंत्रण नहीं होना है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक का कहना है सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार के निर्देश के बाद रेट कंट्रोल करने को लेकर काम किया जा रहा है। जा​निए 4 कारण..जिस कारण कीमतों पर लगाम नहीं 1. लाखों दवाओं में सिर्फ 900 की कीमतों पर नियंत्रण...सरकार ने अभी कुछ जरूरी दवाओं की कीमतों पर ही नियंत्रण किया हुआ है। लाखों दवाओं में से करीब 900 दवाएं ही ऐसी हैं, जिनकी कीमतें नियंत्रित हैं। सरकार 80 प्रतिशत दवाओं की कीमतों पर भी नियंत्रण करे तो मार्जिन एक निश्चित सीमा में आ सकेगा। 2. सरकारी योजनाओं का समय पर भुगतान ना होना...निजी अस्पतालों को सरकारी योजनाओं में इलाज का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। इनका 600 करोड़ रुपए अटका है। निजी अस्पताल इसकी भरपाई मरीजों से करने की कोशिश करते हैं। दवाओं की एमआरपी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने का फायदा उठाकर मरीजों से 2500 प्रतिशत तक मार्जिन वसूला जा रहा है। 3. अस्पतालों का तर्क है...सरकार सीजीएचएस, आरजीएचएस, रेलवे और ईएसआई जैसी योजनाओं में मरीजों के इलाज की दरें नहीं बढ़ा रही। जिन योजनाओं में दरें बढ़ाई गई हैं, उनका लाभ भी समय पर नहीं मिल रहा है। 4. सिर्फ 137 कैंसर दवाओं की एमआरपी तय...एनपीपीए ने नवंबर 2026 में 137 कैंसर दवाओं की एमआरपी तय की है। लेकिन नियंत्रित कीमतों वाली दवाओं की संख्या अब भी बेहद कम है। कैंसर के अलावा अन्य बीमारियों की महंगी दवाओं और चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतों पर भी नियंत्रण जरूरी है।