खोह नागोरियान अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका के 4 माह; भास्कर ने जाने पीड़ित परिवारों के हालात खोह नागोरियान की अवैध पटाखा फैक्ट्री में 8 लोगों के जिंदा जल जाने की घटना के चार माह बाद भी पीड़ित परिवारों के घर में मातम पसरा है। मृतक परिवारों को अब तक न तो कोई सरकारी सहायता मिली है और ना ही किसी प्रकार का सहारा। 9 जून को थाने से महज 100 मीटर दूर अवैध पटाखा फैक्ट्री में बारूद भरते समय आग लगी थी। हादसे को अरसा गुजरने के बाद भास्कर ने रियलिटी चेक किया। संवाददाता पीड़ितों के घर पहुंचा तो आश्रितों में आंखों में दर्द नजर आया। सबसे दर्दनाक कहानी रहीम नगर की उस मां की है, जिसने अपने दो जवान बेटे बिलाल और हाजिम को खो दिया। पोतियों को सीने से चिपकाए बेसुध बैठी बिलाल और हाजिम की मां बोली- मेरे घर के चिराग बुझ गए। तब खूब मजमा लगा, लेकिन बाद में सरकार का कोई आदमी झांकने तक नहीं आया। चाचा इरफान ने कहा- हादसे के बाद से एक पैसे की सरकारी मदद नहीं मिली। कुछ ही दूरी पर बेटे समीर को खोने वाले पिता अनीस बोले- परिवार तब से टूटा हुआ है, सरकारी मदद तो दूर, शुरुआती दिनों के बाद कोई मिलने तक नहीं आया। प्रशासन ने आश्रितों को अपने हाल पर छोड़ा फैक्ट्री में पानी पिलाने गया 15 साल का रब्बिल भी हादसे में जिंदा जल गया था। करीम नगर में मां नाजमीन घर से कुछ दूरी पर हुई उस घटना को याद कर अब भी सिहर उठती है। पिता सिकंदर बोले- इतना बड़ा हादसा हो गया और प्रशासन ने हमें अपने हाल पर छोड़ दिया। फैक्ट्री उसी हाल में है। टूटे-फूटे दरवाजे को बांध रखा है। जले हुए गत्ते, आधी जली पेटियां और दीवारों पर कालिख। स्थानीय लोगों ने बताया- हादसे के 15 दिन तक पुलिस का पहरा रहा, फिर सब भूल गए। गमजदा परिवार बस अपने हाल पर हैं, उन्हें पूछने वाला कोई नहीं। फैक्ट्री के पास न फायर NOC थी, न लाइसेंस, इसके बावजूद थाने के पीछे अवैध रूप से चल रही थी।