बैठक में बताया कि माही बांध का पूर्ण भराव स्तर 281.50 मीटर है, जबकि वर्तमान गेज 275.45 मीटर दर्ज किया गया। इसमें करीब 38.53 टीएमसी पानी ही मौजूद है। उपलब्ध जल के आधार पर बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के कुल 92003 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें बायीं मुख्य नहर से 30990 हेक्टेयर और दायीं मुख्य नहर से 35940 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। शेष क्षेत्र में अन्य नहरों के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा। करीब 7 साल से लगातार खोले जा रहे माही बांध के गेट इस बार बारिश की कमी के कारण नहीं खोले गए। बता दें माही बजाज सागर बांध के निर्माण के बाद से अब तक कुल 27 बार बांध के गेट खोले जा चुके हैं। पहली बार 1984 में खोले गए थे। इसके बाद मानसून और पानी की भारी आवक के कारण यह बांध करीब हर साल लबालब हुआ है। यही वजह है कि इसके गेट साल 1984, 1986, 1988, 1990, 1991, 1993, 1994, 1996, 1997, 1998, 2003, 2004, 2006, 2007, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017, 2019, 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 में भारी आवक के चलते सभी 16 गेट खोले गए। नहर : सिंचित क्षेत्र (हेक्टेयर) बायीं मुख्य नहर : 30990 दायीं मुख्य नहर : 35940 भूंगड़ा नहर : 4682 भीखाभाई सागवाड़ा नहर : 7500 हरिदेव जोशी नहर आनंदपुरी : 12891 प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नहरों में पानी का दुरुपयोग, अवैध कटाव, नहर तोड़ना या गेट से छेड़छाड़ करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। किसानों से अपने हिस्से की नहरों और खेतों की नालियों की सफाई रखने, पानी जरूरत के अनुसार लेने और खेत की सिंचाई पूरी होने पर पानी बंद करने की अपील की है। नहरों में अवरोध या टूट-फूट होने पर संबंधित अधिकारियों को लिखित सूचना देनी होगी। जरूरत पड़ने पर मरम्मत के लिए जल प्रवाह रोका भी जा सकेगा। बांसवाड़ा| माही बजाज सागर परियोजना की जल वितरण समिति की बैठक में 11 नवंबर से नहरों में पानी छोड़ने का प्रस्तावित कार्यक्रम तय किया गया। इस बार नहरें 118 दिन संचालित होंगी। खास बात यह है कि सिंचाई की व्यवस्था के साथ पानी की बर्बादी रोकने की जिम्मेदारी भी किसानों और संबंधित विभागों पर तय की गई है। संभागीय आयुक्त खजान सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित डीओआईटी सभागार में बैठक हुई। इसमें बांध में उपलब्ध पानी, नहरों के संचालन और कमांड क्षेत्र में सिंचाई की स्थिति पर चर्चा की गई। बैठक में जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और जल वितरण समिति से जुड़े किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे। चार चरण में मिलेगा पानी, बीच में बंद रहेंगी नहरें: निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 11 नवंबर से 12 दिसंबर तक खेतों में नमी (रेलनी) के लिए लगातार 32 दिन तक पानी दिया जाएगा। इसके बाद तीन चरणों में नहरों में पानी चलेगा। 13 दिसंबर से 9 जनवरी तक पहला (28 दिन), 17 जनवरी से 13 फरवरी तक दूसरा (28 दिन) और 21 फरवरी से 22 मार्च तक तीसरा चरण (30 दिन) प्रस्तावित हैं। पहले चरण के बाद 10 से 16 जनवरी और दूसरे चरण के बाद 14 से 20 फरवरी तक पानी बंद रहेगा। 22 मार्च के बाद नहरों का संचालन बंद करना प्रस्तावित है।