बालोतरा रीको औद्योगिक क्षेत्र के तृतीय चरण स्थित मोहित फैक्ट्री में शनिवार दोपहर स्लज टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक श्रमिक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर घायल हो गया। शहर के जीरो रेलवे फाटक क्षेत्र की भील बस्ती निवासी प्रकाश (25) व तिलवाड़ा की कालमा की ढाणी निवासी हुकमाराम (35) शनिवार दोपहर करीब 3 बजे फैक्ट्री में करीब आधा दर्जन श्रमिकों के साथ स्लज टैंक की सफाई कर रहे थे। स्लज अधिक होने से टैंक में उतरे प्रकाश का पैर धंस गया व वह आधे से अधिक शरीर तक स्लज में फंस गया। इसी दौरान जहरीली गैस के असर से वह बेसुध हो गया। उसके पीछे टैंक में उतरे हुकमाराम को भी गैस से दम घुटने लगा। वह बाहर निकलते ही बेहोश हो गया। पास में काम कर रहे श्रमिकों ने दोनों को टैंक से बाहर निकाला व अस्पताल पहुंचाया। उपचार के दौरान प्रकाश की मौत हो गई। प्रकाश। बालोतरा . नाहटा अस्पताल की मोर्चरी में धरने पर बैठे परिजन व भील समाज के लोग। मोर्चरी के आगे धरने पर बैठे परिजन, उचित मुआवजे व कार्रवाई की मांग पर अड़े हादसे की सूचना मिलते ही श्रमिकों के परिजन व भील समाज के लोग नाहटा अस्पताल पहुंच गए। सूचना पर एएसआई हरिशंकर मय टीम मौके पर पहुंचे व घटनास्थल का जायजा लिया। मृतक के शव को मोर्चरी में रखवाया गया। परिजनों ने मृतक व घायल को उचित मुआवजा दिलाने व आवश्यक कार्रवाई की मांग को लेकर शव उठाने से इनकार कर दिया। औद्योगिक क्षेत्र के चतुर्थ चरण स्थित लालजीवाला मिल्स में इसी साल मार्च में भी स्लज टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। एक फैक्ट्री में केमिकल स्लज टैंक की सफाई के लिए उतरे तीन श्रमिक जहरीली गैस की चपेट में आ गए थे। तीनों की मौत हो गई थी। उस दौरान भी सुरक्षा उपकरणों के बिना श्रमिकों को टैंक में उतारे जाने की लापरवाही सामने आई थी। इसके बावजूद शनिवार को फिर उसी तरह की घटना होने से औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2014 में 2, 2018 में 3, 3 अप्रेल 22 सेफ्टिक टैंक की सफाई करते 2 श्रमिकों की मौत, अक्टूबर 2022 में रासायनिक पानी की लाइन पर बने सीवर हॉल में काम करते समय 1 की मौत 2 घायल, मार्च 2026 में 3 व शनिवार की घटना में 1 श्रमिक की मौत हो चुकी है। यानि करीब 12 साल में कम से कम 12 से अधिक श्रमिकों की जान टैंक, स्लज व अपशिष्ट की सफाई से जुड़ी घटनाओं में जा चुकी है। केमिकलयुक्त स्लज टैंक में जहरीली गैस व ऑक्सीजन की कमी का खतरा रहता है। ऐसे टैंक में श्रमिकों को उतारने से पहले गैस की जांच, ऑक्सीजन स्तर की निगरानी, सुरक्षा बेल्ट, श्वसन उपकरण व बाहर से निगरानी जैसी सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। हर साल हादसे में श्रमिकों की मौत के बावजूद प्रशासन, श्रम विभाग व पुलिस कार्रवाई को लेकर सख्त कदम नहीं उठा रही है। फैक्ट्रियों में बिना सुरक्षा उपकरण के श्रमिकों से काम करवाया जा रहा है।